- दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने दर्ज की है प्राथमिकी दर्ज की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
फोर्टिस हेल्थकेयर, रैनबैक्सी लैबोरेटरीज और रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के पूर्व प्रमोटर भाइयों मालविंदर और शिविंदर मोहन सिंह के बीच चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब उनकी पत्नियों तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार मालविंदर की पत्नी जापना की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अब शिविंदर की पत्नी अदिति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पिछले साल अक्टूबर में दी गई एक पुलिस शिकायत में जापना ने अदिति और शिविंदर पर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल्ल चैरिटेबल सोसाइटी के अन्य वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर, ट्रस्ट की अपनी सदस्यता को अवैध रूप से खत्म करने का आरोप लगाया था। यह वही ट्रस्ट है जो वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल चलाता है।
जापना ने दर्ज प्राथमिकी में दावा है कि यह कदम ट्रस्ट की संपत्ति और उसकी सालाना कमाई पर कब्जा करने की कथित साजिश का हिस्सा था। उनकी शिकायत के मुताबिक, इस ट्रस्ट के पास करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें वसंत कुंज की कीमती ज़मीन और इलाके में फोर्टिस अस्पताल के संचालन से होने वाली लगभग 30 करोड़ रुपये की सालाना आय शामिल है। भाइयों के बीच दिसंबर 2018 में झगड़ा हुआ था और बात हाथापाई तक पहुंच गई थी। यह दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू द्वारा फंड के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किए जाने से कम से कम एक साल पहले की बात है। इसके बाद 2019 में उन्हें रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड, जो एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है, से 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह जमानत पर हैं और दिल्ली की साकेत कोर्ट में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोपों पर मुकदमे का सामना कर रहे हैं। भाइयों के खिलाफ एफआईआर दिसंबर 2018 में समूह की कंपनी रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नए प्रबंधन द्वारा लगाए आरोपों के आधार पर दर्ज की गई थी, इसकी अगुवाई रश्मि सलूजा कर रही थीं। इसके बाद इस कंपनी का अधिग्रहण डाबर समूह के बर्मन परिवार ने कर लिया।
संपत्तियों पर कब्जा करने की साजिश :
जापना मालविंदर सिंह ने शिकायत में आरोप लगाया कि अदिति और शिविंदर सिंह ने सोसाइटी के कुछ सदस्यों के साथ मिलकर ट्रस्ट की समिति से कई लोगों को, जिनमें वह खुद भी शामिल हैं, हटा दिया और उनकी जगह अदिति की मां, भाई और एक करीबी रिश्तेदार को शामिल कर लिया। शिकायत के अनुसार, मार्च 2025 में सोसाइटी के सदस्यों के रजिस्टर की जांच के दौरान ही जापना को इन बदलावों की जानकारी मिली। उन्होंने कहा है कि इसके बाद उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज को लेकर कुप्रबंधन, वैध सदस्यों को बाहर किए जाने और संभावित धोखाधड़ी की चिंताओं के चलते एक फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया। उनकी शिकायत के मुताबिक, फॉरेंसिक ऑडिट में कथित तौर पर यह सामने आया कि अदिति, शिविंदर और कार्यकारी समिति के कुछ अन्य सदस्यों ने उन्हें और ट्रस्ट के कई अन्य वास्तविक मालिकों को अवैध रूप से हटाने की साजिश रची।
अवैध रूप से बाहर कर दिया :
एफआईआर में कहा कि जापना ने आरोपियों की धोखाधड़ी और आपराधिक मंशा को साबित करने की कोशिश की। आरोपी उन्हें और अन्य वैध सदस्यों को सोसाइटी से हटाकर उसकी बड़ी संपत्तियों और आय के स्रोतों पर अवैध रूप से पूरा नियंत्रण पाना चाहते थे। प्राथमिकी के अनुसार, 29 अप्रैल 2018 से लेकर कथित तौर पर 20 मई 2024 तक हुई बैठकों के कोई दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं।