कई महिला प्रदर्शनकारियों के लिए टेंट बेहद सुविधाजनक है। ट्रैक्टर ट्रॉली में ठंड की चिंता होती थी। बठिंडा निवासी रमनप्रीत कौर, सुखविंदर कौर ने कहा कि टेंट की सुविधा से उन्हें काफी राहत मिली है। टेंट में हवा बेशक कम है, लेकिन मच्छरों से बचाव के लिए भी इंतजाम है। पंजाब-हरियाणा से किसानों के साथ साथ महिलाएं और बच्चे भी समर्थन में काफी संख्या में पहुंच रहे हैं।
सिंघु बॉर्डर पर टॉयलेट और गंदगी एक गंभीर समस्या बनने लगी है। लंगर या जरूरी काम के बाद निकलने वाले कचरे को फेंकने के लिए लगातार सेवादार भी जुटे रहते हैं, बावजूद इसके संख्या अधिक होने की वजह से बुनियादी सुविधाओं की कमी से किसानों को रोजाना रूबरू होना पड़ रहा है।
दिल्ली की सीमा में तो सरकार की ओर से मोबाइल टॉयलेट्स लगवाए गए हैं, लेकिन हरियाणा के हिस्से में संख्या काफी कम है। ऐसे में सुबह या रात के वक्त लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अधिक दिनों तक गंदा पानी आसपास इकट्ठा रहा तो मच्छर के पनपने सहित दूसरी बीमारियां फैलने की भी आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली सरकार की ओर से मोबाइल टॉयलेट की तो सुविधा मुहैया की गई हैख् लेकिन कई बार वहां पानी की कमी और गंदगी की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंदे पानी के इकट्ठा होने से पैदा होने वाले मच्छरों के बारे में एक युवक ने कहा कि इसके लिए इंतजाम किए गए हैं। रात के वक्त लकड़ियां जलाने के बाद काफी राहत मिलती है।
आसपास के पेट्रोल पंप, गेस्ट हाउस सहित तमाम वाणिज्यिक परिसरों के टॉयलेट्स भी समर्थकों के लिए खोल दिए गए हैं। बावजूद इसके संख्या अधिक होने और इसकी सफाई के लिए उचित व्यवस्था न होने की वजह से मुश्किलें बनी हुई हैं।
आसपास के घरों में महिलाओं के लिए जरूरी सुविधा
कुंडली के कुछ घरों में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया करवाई गई हैं ताकि समर्थकों को किसी तरह की परेशानी न आए। आसपास के ग्रामीणों के साथ होने की वजह से मुश्किलों का सामना आसानी से कर पा रहे हैं। एक किसान ने बताया कि उन्हें कई बार पानी की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। पानी के टैंकर का सभी कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है जबकि पीने के लिए लंगर में बिमनरल वॉटर हैं।
मिल जुलकर करते हैं सफाई
हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी से रोजाना पैदा होने वाले कचरे को हटाने के लिए बड़े बड़े डस्ट बिन्स लगाए गए हैं। लंगर के बाद इनमें कचरा इकट्ठा होता है, लेकिन हर घंटे काफी कचरा पैदा होता है, जिनकी सफाई के लिए निगम कर्मी दोपहर के वक्त तो पहुंचते हैँ। इसके बाद समर्थक ही मिल जुलकर सफाई करते हैं।