गुड्स एंड सर्विस टैक्स व्यवस्था का एक साल पूरा होने वाला है। पूरे साल इसका खट्टा-मीठा अनुभव व्यापारियों के बीच दिखा। व्यापारियों ने कभी इसकी शिकायत की तो कभी बढ़-चढ़ कर इसे अपनाया। इसका दिल्ली के टैक्स कलेक्शन पर जबरदस्त सकारात्मक असर देखने को मिला।
व्यापारियों के हां-ना के बावजूद जीएसटी ने दिल्ली के खजाने में पंद्रह फीसदी का इजाफा कर दिया। 40 प्रतिशत के करीब टैक्स देने वालों की संख्या में वृद्धि हुई। इसके लागू होने से दो लाख नए व्यापारी टैक्स देने लगे।
वित्त अधिकारियों की मानें तो इसमें अभी 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई है। मौजूदा वित्त वर्ष में 15 प्रतिशत से बढ़कर 20-25 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जीएसटी पंजीकृत कारोबारियों की संख्या 7 लाख के करीब पहुंच गई है। जीएसटी के साथ सर्विस टैक्स में राज्य को हिस्सेदारी मिलने से आय का श्रोत बढ़ गया है।
क्या कहते हैं व्यापारी
बेहतर टैक्स रिफार्म, लेकिन ठीक से लागू नहीं किया
जीएसटी के एक साल पूरा होने पर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के कन्वीनर बृजेश गोयल का कहना है कि यह एक अच्छा टैक्स रिफार्म होने के बावजूद इसे ठीक तरीके से लागू नहीं किया गया। टैक्स प्रणाली पिछले एक साल में अपने मूल उद्देश्य में कामयाब नहीं हो पाई। बार-बार सिस्टम में बदलाव करने के कारण व्यापार प्रभावित हुआ। रिटर्न प्रणाली, रिफंड प्रणाली, ई-वे बिल, हाई टैक्स रेट को लेकर जीएसटी काउंसिल पूरे साल जूझता रहा। सीमेंट, पेंट, फ्रिज, ऑटो स्पेयर पार्ट्स, टू व्हीलर पार्ट्स, वाशिंग मशीन जो आम लोगों की जरूरत की वस्तुएं हैं, इन पर 28 प्रतिशत लक्जरी स्लैब उचित नहीं है।
सकारात्मक असर, भ्रष्टाचार रुका
व्यापारी व सोशल वर्कर नीतू सिंह का कहना है कि अगर पूरे एक साल की बात करें तो जीएसटी से अर्थव्यवस्था पर बहुत ही सकारात्मक असर पड़ा है। भ्रष्टाचार में भी कमी आई है। आम आदमी को भी इसका फायदा मिल रहा है। महिला व्यापारियों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। व्यापारियों को पंजीकृत कराया। महिला व्यापारी रेडीमेड गारमेंट्स के व्यापार से जुड़ी हैं, लिहाजा इसके टैक्स स्लैब को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की आवश्यकता है।
अभी सुधार की गुंजाइश
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि नई कर व्यवस्था में व्यापारियों के सामने कई चुनौतियां थी। बावजूद जीएसटी को कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों ने अपनाया। हालांकि इस कर प्रणाली में काफी बदलाव की जरूरत है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था का बोझ कम हुआ है। अधिकारियों के साथ सीधा संपर्क समाप्त हो गया है। इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगी है। इनपुट क्रेडिट का मिलना इसकी विशेषता है। व्यापारी को कर अपने पास से नहीं देना होता, अंतिम उपभोक्ता पर कर देने की जिम्मेदारी है। मासिक रिटर्न की जगह तिमाही रिटर्न की व्यवस्था होनी चाहिए। सामानों के वर्गीकरण को और अधिक सरल बनाने की जरूरत है। शिकायतों के पारदर्शी निपटान के लिए जीएसटी लोकपाल का गठन होना चाहिए। एक ही राज्य में सामान की आवाजाही पर ई-वे बिल नहीं लगना चाहिए। जीएसटी और भी अच्छी कर प्रणाली हो सकती है, अगर सरकार व्यापारियों के साथ सीधा संवाद शुरू करे।
जमीनी स्तर पर जीएसटी विभाग ने काम नहीं किया
फेडरेशन ऑफ ट्रेड एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष अजय अरोड़ा का कहना है कि जमीनी स्तर पर जीएसटी विभाग ने काम नहीं किया। इंटरनेट का सिग्नल नहीं मिलता है। इससे ई-वे बिल निकालना मुश्किल हो गया है। सदर बाजार, पुरानी दिल्ली, गांधी विहार समेत कई जगहों पर व्यापारियों को मजबूरन साइबर कैफे जाना पड़ता है। खरीदारों को ई-वे बिल देने के लिए बराबर जीएसटी में संशोधन हो रहा है। इसकी जानकारी तीन दिन बाद व्यापारियों को मिलती है। जीएसटी देने में परेशानी नहीं, सुविधा चाहिए। ई-वे बिल काम नहीं करता है क्योंकि वाई-फाई ठीक से काम नहीं करता है। सर्वे करके व्यवस्था करनी चाहिए।
व्यवधान दूर करने की आवश्यकता
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि कर प्रणाली तो ठीक है, लेकिन अभी इसमें कई व्यवधान भी हैं। हमें दो बार जीएसटी देनी पड़ रही है। किसी से माल लेने पर भी जीएसटी देना पड़ रहा है और उधार देने पर भी जीएसटी देना पड़ रहा है। इस तरह 18 प्रतिशत की जगह 36 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है। माल बिकने पर ही रिफंड मिल रहा है। इस तरह से सरकार के पास व्यापारियों का करोड़ों रुपया जमा है। सरकार तो ब्याज लेती है, लेकिन हमें इसका कोई फायदा नहीं मिलता। इंटरनेट की वजह से ई-वे बिल में परेशानी आती है। सरकार व्यापारियों को राहत दे। जो कमियां हैं, उसे ठीक करे।
महिला व्यापारियों के लिए हेल्प कैंप लगे
महिला व्यापारी आकृति भारती का कहना है कि जीएसटी जब लागू हुआ था तो महिला कारोबारियों को काफी दिक्कतें आई। नया टैक्स रिफार्म होने के कारण इसको समझने में काफी समय लग गया। अच्छा होता महिला कारोबारियों के लिए सरकार अलग से एक कैंप लगाए। आर्थिक व्यवस्था इस टैक्स प्रणाली से बेहतर होगी व भ्रष्टाचार खत्म होगा।