दरअसल 13 मार्च 2019 को अमर उजाला ने एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में बिस्तरों की कमी सहित तमाम मुद्दों को अपने पाठकों तक पहुंचाया था। उस दौरान एम्स प्रबंधन ने प्रस्ताव विचाराधीन होने की पुष्टि भी की थी। साथ ही किडनी के रोगियों के लिए देश का सबसे बेहतर सेंटर एम्स में बनाए जाने की योजना के बारे में भी बताया था।
एम्स में अब तक करीब 2800 से ज्यादा किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। वर्ष 1971 में यहां पहला किडनी डायलिसिस और प्रत्यारोपण वर्ष 1972 में शुरू हुआ था। डॉक्टरों की मानें तो पिछले 30 वर्ष से एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में एक भी बिस्तर नहीं बढ़ा है।
जबकि एम्स में लगभग 40 हजार रुपये में गरीब मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण हो जाता है वहीं निजी अस्पतालों में इसके कुल खर्च की अनुमानित कीमत 8 लाख से 12 लाख रुपये तक है।
एम्स के डॉक्टरों की मानें तो करीब 20 वर्ष से एम्स में किडनी का विशेष सेंटर बनाए जाने की योजना है। इस पूरी योजना पर सरकार को करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च भी करने थे, लेकिन फिलहाल इसकी फाइल कहां है, ये किसी की जानकारी में नहीं है।
विभाग में वर्षों से 13 डायलिसिस मशीनें और 24 बिस्तरों की सुविधा चली आ रही है। 24 में से चार किडनी प्रत्यारोपण और दो बिस्तर डायलिसिस के लिए आरक्षित हैं।
जबकि एम्स की ओपीडी में हर दिन 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और इनमें से करीब 120 से भी ज्यादा मरीजों को प्रत्यारोपण की नौबत पड़ती है। फिलहाल किडनी प्रत्यारोपण की वेटिंग भी एक वर्ष से ऊपर जा पहुंची है।