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आखिरकार नहीं बढ़े बिस्तर, एम्स में किडनी प्रत्यारोपण किया बंद, पीएमओ से भी कर चुके हैं अपील

Mon, 25 Nov 2019 02:07 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

- लंबे समय से नेफ्रोलॉजी विभाग को नहीं मिले हैं बिस्तर, पीएमओ, स्वास्थ्य मंत्रालय तक से अपील कर चुके हैं डॉक्टर
- इसी साल 13 मार्च को अमर उजाला ने विभाग की मुश्किलों का किया था खुलासा
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aiims - फोटो : file photo
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विस्तार
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आखिरकार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बिस्तरों की संख्या नहीं बढ़ने की वजह से किडनी प्रत्यारोपण बंद करना पड़ गया। डॉक्टरों का कहना है कि एम्स प्रबंधन से लेकर सरकार तक हर किसी से वर्षों से अपील करते करते थक चुके हैं।

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अब उनके पास इतने संसाधन नहीं है कि मरीज को उपचार भी दे पाएं। एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में इस समय किडनी प्रत्यारोपण के लिए करीब चार सौ से ज्यादा मरीजों की वेटिंग है। संसाधन पर्याप्त न होने की वजह से एम्स में काफी समय ज्यादातर मरीजों को डायलिसिस के लिए दूसरे अस्पतालों में भेज दिया जाता है।

नेफ्रोलॉजी विभाग के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि उनके विभागाध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल बीते कई सालों से बिस्तरों को बढ़ाए जाने की मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तो कभी एम्स प्रबंधन को लिखित अपील कर रहे हैं।
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इतना ही नहीं व्यक्तिगत तौर पर वे पीएमओ और कई मंत्रियों तक से अपील कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई भी संज्ञान नहीं ले रहा। उन्होंने बताया कि करीब 25 दिन से एम्स में प्रत्यारोपण नहीं हो पाए हैं। जबकि एक सप्ताह में 3 से 4 प्रत्यारोपण किए जाते हैं।

13 मार्च 2019 को अमर उजाला ने बिस्तरों की कमी का मुद्दा उठाया था

दरअसल 13 मार्च 2019 को अमर उजाला ने एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में बिस्तरों की कमी सहित तमाम मुद्दों को अपने पाठकों तक पहुंचाया था। उस दौरान एम्स प्रबंधन ने प्रस्ताव विचाराधीन होने की पुष्टि भी की थी। साथ ही किडनी के रोगियों के लिए देश का सबसे बेहतर सेंटर एम्स में बनाए जाने की योजना के बारे में भी बताया था।

एम्स में अब तक करीब 2800 से ज्यादा किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। वर्ष 1971 में यहां पहला किडनी डायलिसिस और प्रत्यारोपण वर्ष 1972 में शुरू हुआ था। डॉक्टरों की मानें तो पिछले 30 वर्ष से एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में एक भी बिस्तर नहीं बढ़ा है।

जबकि एम्स में लगभग 40 हजार रुपये में गरीब मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण हो जाता है वहीं निजी अस्पतालों में इसके कुल खर्च की अनुमानित कीमत 8 लाख से 12 लाख रुपये तक है।
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20 साल से कागजों में बन रहा है सेंटर

एम्स के डॉक्टरों की मानें तो करीब 20 वर्ष से एम्स में किडनी का विशेष सेंटर बनाए जाने की योजना है। इस पूरी योजना पर सरकार को करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च भी करने थे, लेकिन फिलहाल इसकी फाइल कहां है, ये किसी की जानकारी में नहीं है।

विभाग में वर्षों से 13 डायलिसिस मशीनें और 24 बिस्तरों की सुविधा चली आ रही है। 24 में से चार किडनी प्रत्यारोपण और दो बिस्तर डायलिसिस के लिए आरक्षित हैं।

जबकि एम्स की ओपीडी में हर दिन 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और इनमें से करीब 120 से भी ज्यादा मरीजों को प्रत्यारोपण की नौबत पड़ती है। फिलहाल किडनी प्रत्यारोपण की वेटिंग भी एक वर्ष से ऊपर जा पहुंची है।
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