हर नाम के पीछे अलग है कहानी
इन सब में मनोज तिवारी के नाम को लेकर तर्क दिया जा रहा है कि पहले नगर निगम और अब लोकसभा चुनाव में भाजपा का सबसे बेहतर प्रदर्शन इनके नेतृत्व में हुआ है। इसलिए कार्यकर्ताओं का कहना है कि मनोज तिवारी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव होने से भाजपा का 22 साल का वनवास खत्म हो सकेगा। लोकसभा चुनाव में स्टार प्रचारक की भूमिका निभा चुके मनोज तिवारी पीएम मोदी और अमित शाह के काफी भरोसेमंद माने जाते हैं। सूत्रों की मानें तो अंदरखाने प्रवेश सिंह वर्मा का नाम उनकी ऐतिहासिक जीत के बाद से आने लगा है। हालांकि प्रवेश वर्मा ने कभी खुले मंच पर आकर दिल्ली की कुर्सी को लेकर इच्छा नहीं जताई है, लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी हाईकमान के सामने उनके नाम का कई बार जिक्र हुआ है।
दिल्ली में सक्रिय रहने का मिल सकता है इनाम
केंद्रीय मंत्री रहे विजय गोयल भी दिल्ली में भाजपा का नेतृत्व कर चुके हैं। हालांकि इस बार उन्हें कैबिनेट में स्थान नहीं मिला है। इसे लेकर भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री की दावेदारों की दौड़ में उन्हें शामिल कर रहे हैं। हालांकि विजय गोयल दिल्ली में खासा सक्रिय नेता भी हैं। लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी के लिए खूब प्रचार प्रसार किया था। इनके अलावा विजेंद्र गुप्ता की बात की जाए तो विपक्ष में रहते हुए दिल्ली सरकार को लगातार कटघरे में खड़ा रखते हैं। बिजली, पानी से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा तक के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की सरकार को उन्होंने कटघरे में कई बार खड़ा किया है। रोहिणी से भाजपा के चुनिंदा विधायकों में से एक विजेंद्र गुप्ता जमीनी नेता के रूप में जाने भी जाते हैं।