नोएडा के एक मॉल में दिल्ली की 21 साल एक युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। दिल्ली के साकेत कोर्ट के बाहर पहुंचकर पीड़िता ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
मेडिकल कराने के बाद साकेत थाने में पीड़िता के बयान पर जीरो एफआईआर दर्ज कर ली गई। चूंकि मामला नोएडा के सेक्टर-39 थाना क्षेत्र का था। इसलिए पुलिस ने आरोपी योगेश को गिरफ्तार कर मामले की तफ्तीश नोएडा पुलिस को सौंप दी।
पुलिस के मुताबिक पीड़िता बदरपुर में रहती है। फिलहाल वह फरीदाबाद की एक निजी कंपनी में नौकरी करती है। कुछ समय पूर्व वह साकेत कोर्ट में एक वकील के पास सहायक का काम करती थी।
लिव-इन-रिलेशन में रहते थे युवक व युवती
दो साल पूर्व उसकी मुलाकात जैतपुर निवासी योगेश (25) नामक युवक से हुई थी। दोनों ने लिव इन रिलेशन में रहना शुरू कर दिया। इस बीच पीड़िता ने उस पर शादी का दबाव बनाया, लेकिन युवक ने शादी से इनकार कर दिया।
दोनों ने पिछले कुछ दिनों से अलग रहना शुरू कर दिया। आरोप है कि शनिवार को पीड़िता किसी काम से नोएडा सेक्टर-18 के एक मॉल में गई। वहां इसे योगेश मिला।
आइस्क्रीम खिलाने के बहाने योगेश पीड़िता को मॉल के बेसमेंट में ले गया। यहां उसने जान से मारने की धमकी देकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
इस तरह हो पाई रेप आरोपी की गिरफ्तारी
पीड़िता वापस दिल्ली पहुंची। यहां साकेत कोर्ट के बाहर उसने पीसीआर कॉल
की। पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर
ली।
बाद में योगेश को जैतपुर में उसके घर से दबोच लिया गया। अब पूरा मामला
नोएडा थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर एक अन्य मामले में दिल्ली की एक अदालत ने महिला को आपत्तिजनक मैसेज भेजने के आरोपी को
मिली सजा को रद्द करते हुए कहा कि आरोपी को सजा देने के ठोस साक्ष्य नहीं
है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितेश सिंह ने उत्तरी दिल्ली निवासी आरोपी युवक को मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदान चार माह की कैद व 9 हजार रुपये जुर्माने की सजा को रद्द कर दिया।
युवती से संबंध बनाने के लिए भेजता था अश्लील मैसेज
अदालत ने कहा कि पुलिस युवती को किए फोन व मैसेज की जांच पूरी तरह से करने में असफल रही है। अदालत ने कहा पुलिस दस्तावेजों को कानूनी दस्तावेज के रूप में भी पेश करने में असफल रही है।
उन्होंने कहा कि पेश साक्ष्य कई हिस्सों में है। इसके अलावा पीड़ित युवती की बीमारी की हालत में मौत हो गई और उसे गवाह के रूप में भी पेश नहीं किया जा सका। ऐसे में उसे सजा नहीं दी जा सकती। पुलिस के अनुसार आरोपी ने युवती के फोन पर कई आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे।
गिरफ्तारी के बाद उसने माना था कि वह युवती से संबंध बनाना चाहता था, युवती ने रजामंदी नहीं दी जिस कारण उसने आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे। सुनवाई के दौरान आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है।