16 दिसंबर 2012 गैंगरेप के बाद हुए धरना प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने रेप मामलों में कानून पर विचार के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। वर्मा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रजातंत्र के जरूरी हिस्से पुलिस, जनप्रतिनिधि कानून, न्यायिक व्यवस्था, सैन्य विशेषाधिकार कानून आदि में सुधार की वकालत की थी।
जनवरी 2013 में कमेटी ने अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी थी। फरवरी में सरकार ने सिफारिशों में से कुछ को महिला कानून में शामिल किया था। वैवाहिक बलात्कार और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे मुद्दों को आम सहमति के अभाव में संशोधित कानून में शामिल नहीं किया गया था।
कमेटी को देशभर से कुल 80 हजार सुझाव मिले थे, जिसमें यौन हिंसा, लिंग भेद, राजनीति का अपराधीकरण रोकने के उपाय सुझाए गए थे। कानूनविदों, सरकार और सामाजिक संगठनों से बातचीत के बाद 29 दिन में ये रिपोर्ट तैयार की गई। कमेटी में न्यायमूर्ति वर्मा के अलावा न्यायमूर्ति लीला सेठ और पूर्व सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम शामिल थे।