क्रिकेट वर्ल्डकप में पाकिस्तान के खिलाफ इंडिया की लगातार छठी जीत के बाद युवाओं में क्रिकेट मैच देखने का क्रेज दोगुना हो गया है। इस विश्व कप को लेकर केवल युवकों में ही नहीं बल्कि युवतियों में भी दीवानगी नजर आ रही है।
मैच देखने के लिए लड़कियों के जत्थे गांव की गली-मोहल्लों से लेकर मॉल्स, रेस्टोरेंट में भी नजर आ रहे हैं। इनमें से बहुत सी राष्ट्रीय और राज्यस्तर पर खेल चुकी क्रिकेट खिलाड़ी हैं जो अपने कोच और टीम के साथ मिलकर मैच देखने का लुत्फ तो उठा ही रही हैं, साथ ही इन्हें देखकर टीम में एकजुटता, हर खिलाड़ी के खेलने का अंदाज, क्रिकेट के नियम-कायदे आदि के मौलिक गुर सीख रही हैं और उसी अंदाज में प्रशिक्षण लेती हैं।
खिलाड़ी वर्षा वर्मा ने बताया कि वह पिछले तीन साल से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। यह उनका पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप है, जिससे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है।
खिलाड़ी बनने के लिए देखने का अनुभव जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान कोच ने जो नियम सिखाए हैं वह मैच देखने से याद रहते हैं। इसके अलावा क्रिकेट के गुर सीखने के साथ अपने कोच और टीम देखने का मजा ही अलग है।
खिलाड़ी श्वेता शर्मा ने बताया कि वह अपनी टीम की कप्तान हैं। विश्व कप में विभिन्न देशों की टीमों के कप्तान कैसे कप्तानी करते हैं, यह सीख रही हैं।
एक कप्तान अपनी टीम में एकजुटता बनाए रखता है। कब, कहां और कैसे बॉलिंग, गेंदबाजी और फील्डिंग में खिलाड़ी का इस्तेमाल करना है, यह अहम होता है।
इस तरह कल्पना ने बताया कि हर खिलाड़ी का खेलने का अंदाज हटकर होता है। खेल के दौरान ध्यान रखने वाले बहुत से बेसिक गुर सीखने को मिलते हैं। केवल हाथ में बल्ला और गेंद पकड़ने से अच्छा खिलाड़ी नहीं बना जा सकता।
क्रिकेट खिलाड़ी बनने के लिए खेलने के साथ मैच देखने का अनुभव जरूरी है। अक्सर 20-20 मैच दो घंटे का होता है, लेकिन विश्व कप 50-50 ओवर का होता है। लंबे समय तक चलने वाले इन मैचों में खिलाड़ी मैच के दौरान कैसे अपने आप को फिट रखता है, बीच-बीच में वह कैसे वार्मअप करता है, उसकी गेंदबाजी का अंदाज आदि देखकर बहुत कुछ सीखते हैं।
-आरती, नेशनल खिलाड़ी