फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोएडा में जल्द शुरू होगा एडॉप्शन सेंटर, नवजात से 6 साल तक के बच्चों को ले सकेंगे गोद

Fri, 03 Aug 2018 04:01 AM IST
नेहा शर्मा, अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
child Adoption Center
विज्ञापन

जिले में जल्द ही एडॉप्शन सेंटर खुलने वाला है। यहां से नवजात से लेकर 6 साल तक के बच्चों को गोद दिया जा सकेगा। केंद्र के शुरू होने से लावारिस अवस्था में मिलने वाले नवजातों को मथुरा स्थित एडॉप्शन सेंटर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शासन से इसकी अनुमति मिल गई है।

विज्ञापन


चाइल्ड लाइन के कॉर्डिनेटर सत्यप्रकाश ने बताया कि सेंटर खोलने के लिए शासन से अनुमति मिल गई है। इसके संचालन की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को दी जाएगी। एजेंसी ही जगह देखेगी। अगर किसी को बच्चा गोद लेना होता है तो पूरी प्रक्रिया करनी पड़ती है। 

जिले में कहीं पर भी नवजात मिलता है, तो चाइल्ड लाइन की टीम मेडिकल जांच कराकर मथुरा स्थित एडॉप्शन सेंटर में भेज देती है। ऐसे में वहां पर भी दबाव बढ़ जाता है। एडॉप्शन सेंटर के कर्मचारियों का कहना है कि ज्यादा बच्चों के आने से उनकी ठीक ढंग से देखभाल नहीं हो पाती है। ऐसे केंद्र हर जगह होने चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया

बच्चों को छोड़े जाने वाले मामले
- करीब एक साल पहले सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल में एक महिला नवजात बच्ची को अस्पताल में ही छोड़कर चली गई थी। महिला ने अस्पताल में फोन नंबर तक गलत लिखवाया था।
- करीब 9 महीने पहले जिला अस्पताल के शौचालय में महिला भ्रूण छोड़कर चली गई थी। उसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
- करीब डेढ़ साल पहले महिला बरौला स्थित झाड़ियों में बच्ची को फेंक कर चली गई थी। बच्ची को कुत्तों ने भी नोंच लिया था, हालांकि उसकी जान बचा ली गई थी। इसके बाद बच्ची को चाइल्ड लाइन की टीम को सौंप दिया गया।
- लगभग ढाई साल पहले एक महिला बच्ची को जिला अस्पताल छोड़कर जा रही थी, तभी वहां के गार्ड ने उसे पकड़ लिया।
-  पिछले सप्ताह दो महिला मेट्रो स्टेशन के खंभे के नीचे बच्ची को छोड़कर चली गई थी। बच्ची को चाइल्ड पीजीआई में भर्ती कराया गया है।

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया
- बच्चा गोद लेने के लिए पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
- इसके बाद आवेदक का सत्यापन किया जाता है। आर्थिक स्थिति से लेकर बच्चा क्यों गोद ले रहे हैं, इसका कारण जाना जाता है।
- आवेदक को सभी स्थायी पते के साथ ही वर्तमान में रहे हैं पते का प्रमाणपत्र देना होता है।
- इसके अलावा बच्चा गोद लेने के इच्छुक लोगों को अपना स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी देना पड़ता है। 
- आवेदक बच्चे की जिम्मेदारी उठाने लायक हैं, इसकी जांच की जाती है।
- पूरी प्रक्रिया होने के बाद एजेंसी से फोन आता है, तब एडॉप्शन सेंटर में जाकर बच्चे को ले सकते हैं।
- आपकी मनमर्जी से नहीं, सेंटर ही तय करता है कि कौन सा बच्चा आपको देना है।
- जरूरी होने पर कोर्ट की निगरानी में बच्चा सौंपा जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें