बच्चों को छोड़े जाने वाले मामले
- करीब एक साल पहले सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल में एक महिला नवजात बच्ची को अस्पताल में ही छोड़कर चली गई थी। महिला ने अस्पताल में फोन नंबर तक गलत लिखवाया था।
- करीब 9 महीने पहले जिला अस्पताल के शौचालय में महिला भ्रूण छोड़कर चली गई थी। उसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
- करीब डेढ़ साल पहले महिला बरौला स्थित झाड़ियों में बच्ची को फेंक कर चली गई थी। बच्ची को कुत्तों ने भी नोंच लिया था, हालांकि उसकी जान बचा ली गई थी। इसके बाद बच्ची को चाइल्ड लाइन की टीम को सौंप दिया गया।
- लगभग ढाई साल पहले एक महिला बच्ची को जिला अस्पताल छोड़कर जा रही थी, तभी वहां के गार्ड ने उसे पकड़ लिया।
- पिछले सप्ताह दो महिला मेट्रो स्टेशन के खंभे के नीचे बच्ची को छोड़कर चली गई थी। बच्ची को चाइल्ड पीजीआई में भर्ती कराया गया है।
बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया
- बच्चा गोद लेने के लिए पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
- इसके बाद आवेदक का सत्यापन किया जाता है। आर्थिक स्थिति से लेकर बच्चा क्यों गोद ले रहे हैं, इसका कारण जाना जाता है।
- आवेदक को सभी स्थायी पते के साथ ही वर्तमान में रहे हैं पते का प्रमाणपत्र देना होता है।
- इसके अलावा बच्चा गोद लेने के इच्छुक लोगों को अपना स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी देना पड़ता है।
- आवेदक बच्चे की जिम्मेदारी उठाने लायक हैं, इसकी जांच की जाती है।
- पूरी प्रक्रिया होने के बाद एजेंसी से फोन आता है, तब एडॉप्शन सेंटर में जाकर बच्चे को ले सकते हैं।
- आपकी मनमर्जी से नहीं, सेंटर ही तय करता है कि कौन सा बच्चा आपको देना है।
- जरूरी होने पर कोर्ट की निगरानी में बच्चा सौंपा जाता है।