खेल-कूद और पढ़ाई की उम्र में किशोर दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराधों में भी तेजी से शामिल हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक जनवरी से 15 जून 2026 के बीच दुष्कर्म के मामलों में नाबालिग आरोपियों की संख्या 61 से बढ़कर 86 हो गई।
राष्ट्रीय राजधानी में किशोरों के अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। चोरी और जेबकतरी तक सीमित रहने वाले नाबालिग अब हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, दुष्कर्म, फायरिंग और चाकूबाजी जैसे गंभीर अपराधों में तेजी से शामिल हो रहे हैं।
विज्ञापन
दिल्ली पुलिस के एक जनवरी से 15 जून 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि अपराध की लगभग हर श्रेणी में नाबालिग आरोपियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। सबसे अधिक वृद्धि डकैती और लूट के मामलों में 54.80 फीसदी तथा हत्या के प्रयास के मामलों में 54.36 फीसदी दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दिल्ली में 2,300 से अधिक किशोर अपराध के मामले दर्ज किए गए। राजधानी में किशोर अपराध दर करीब 42 मामले प्रति एक लाख नाबालिग आबादी रही, जो देश के सभी प्रमुख महानगरों में सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि अपराध की बढ़ती गंभीरता कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
विज्ञापन
दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक जनवरी से 30 जून 2026 तक कुल 1,404 नाबालिगों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों में कार्रवाई की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 1,080 थी। यानी कुल किशोर अपराध में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, डकैती और लूट के मामलों में नाबालिग आरोपियों की संख्या 104 से बढ़कर 161 हो गई। हत्या के मामलों में यह संख्या 80 से बढ़कर 100, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में 103 से बढ़कर 159 पहुंच गई। चोट पहुंचाने के मामलों में 105 से बढ़कर 141 और चोरी व सेंधमारी के मामलों में 278 से बढ़कर 334 नाबालिग आरोपी दर्ज किए गए।
अन्य आईपीसी/बीएनएस अपराधों में भी 349 से बढ़कर 423 मामले सामने आए हैं। हाल के महीनों में सामने आई घटनाएं इस बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति की पुष्टि करती हैं। जून 2026 में पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 में मामूली टक्कर के बाद हुए विवाद में तीन किशोरों ने 18 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने तीनों नाबालिग आरोपियों को पकड़ लिया। इसी तरह मई 2026 में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में एक 16 वर्षीय किशोर को कक्षा 12 के छात्र के सिर में गोली मारने के आरोप में पकड़ा गया।
इस घटना ने किशोरों तक अवैध हथियारों की पहुंच और छोटे विवादों के हिंसक रूप लेने पर गंभीर सवाल खड़े किए। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के आदर्श नगर में एक नाबालिग को मोटरसाइकिल में आग लगाने के आरोप में पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया पर हथियारों के फोटो और वीडियो साझा कर इलाके में अपना दबदबा बनाने की कोशिश करता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अपराध को स्टेटस सिंबल की तरह पेश करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों में बढ़ती आक्रामकता के पीछे कई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं।
मनोचिकित्सक की राय
डॉ. लोकेश शेखावत, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, आरएमएल अस्पताल
किशोरावस्था में एक बड़ी समस्या यह है कि वे बहुत जल्दी आवेग में आ जाते हैं। उनकी भावनाएं एकदम चरम पर पहुंच जाती हैं। दूसरी बड़ी समस्या आइडेंटिटी क्राइसिस यानी अपनी पहचान बनाने की तड़प है। उन्हें लगता है कि हमें रुतबा बनाना है, खौफ पैदा करना है।
कुछ बच्चों में कंडक्ट डिसऑर्डर होता है। ऐसे बच्चे हिंसा को पसंद करते हैं, गैंग बनाते हैं और दूसरों को दबाकर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। इनमें दूसरों की पीड़ा के प्रति संवेदना नहीं होती।
अगर आपका बच्चा स्कूल से भाग रहा है, गैंग के साथ घूम रहा है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है, नशे की ओर झुकाव दिखा रहा है, घर से पैसे चुराता है या घंटों गायब रहता है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। ऐसे बच्चों का समय रहते मनोचिकित्सक से इलाज कराना जरूरी है, वरना वे अपने साथ पूरे परिवार और समाज के लिए भी बड़ी समस्या बन सकते हैं।
यौन अपराधों में भी बढ़ी नाबालिगों की संलिप्तता
खेल-कूद और पढ़ाई की उम्र में किशोर दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराधों में भी तेजी से शामिल हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक जनवरी से 15 जून 2026 के बीच दुष्कर्म के मामलों में नाबालिग आरोपियों की संख्या 61 से बढ़कर 86 हो गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में 40.98 फीसदी अधिक है। एक जनवरी से 30 जून 2026 के बीच दिल्ली में 1,404 नाबालिगों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों में कार्रवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 1,080 थी।
डकैती-लूट, हत्या, हत्या के प्रयास, चोट पहुंचाने, चोरी और सेंधमारी सहित लगभग सभी प्रमुख अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई है।