मुख्य चुनाव आयुक्त सैयद नसीम अहमद जैदी ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से देश में ईआरओ-नेट लांच किया। इस सॉफ्टवेयर के जरिये देश के सभी संसदीय चुनाव क्षेत्र और विधानसभा चुनाव क्षेत्रों के ईआरओ आपस में डाटा शेयर कर सकेंगे। इससे फर्जी वोटर कार्ड पर अंकुश लगेगा।
लघु सचिवालय में उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी हरदीप सिंह व अतिरिक्त उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता में बताया कि यह ईआरओ-नेट प्रणाली आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी। इसके द्वारा नए आवेदकों के पहचान पत्र फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरे जाएंगे। इस नेट आधारित प्रक्रिया से भारत का एक नागरिक केवल एक ही वोटर कार्ड बनवा सकेगा।
इस प्रक्रिया के लागू होने के बाद वास्तव में वोटर की संख्या और डुप्लीकेसी खत्म हो जाएगी। अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि यह ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसके माध्यम से मतदाताओं का सारा डाटा एक ही नेशनल सर्विस वोटर पोर्टल (एनएसवीपी) पर उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि ईआरओ-नेट पेपरलैस काम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर उनके साथ नायब तहसीलदार चुनाव दिनेश कुमार, कानूनगो दयाचंद, अजय, अनीता बादशाहपुर और गुुरुग्राम विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ, सुपरवाइजर सहित कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
अब एक व्यक्ति दो वोटर कार्ड नहीं बनवा सकेगा
कोई व्यक्ति बिहार में वोटर कार्ड बनवा चुका है। वह हरियाणा में भी वोटर कार्ड के लिए अप्लाई कर देता है। ऐसे में ऑनलाइन रिकॉर्ड होने के कारण उसका फॉर्म यहां अपलोड करते ही बिहार के रिटर्निंग अधिकारी को इसका अलर्ट मिल जाएगा। वहां संबंधित रिटर्निंग अधिकारी द्वारा सत्यापित होने और बिहार से उसका वोटर कार्ड कैंसिल होने के बाद ही आवेदक का वोटर कार्ड हरियाणा में बनेगा।