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एसिड पीड़ित बहनों ने तीन लाख मुआवजे की सीमा को दी चुनौती

Wed, 18 Jan 2017 11:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : DEMO Pics
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एसिड हमले की शिकार दो बहनों ने इस प्रकार के मामलों में मुआवजे की सीमा तय करने संबंधी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली राज्य विधिक सेवा आयोग व महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 
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न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने उन्हें 14 फरवरी से पूर्व जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इन दोनों बहनों पर वर्ष 2009 में तेजाब से हमला किया गया था।


दोनों बहनें इस हमले से दृष्टिहीन हो गई हैं। उन्हें तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा प्रदान किया गया था। दोनों ने डीएलएसए द्वारा तीन लाख रुपये प्रदान मुआवजे को बढ़ाने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने मुआवजा राशि की सीमा तय करने के निर्णय को भी खारिज करने का आग्रह किया है। 
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सर्जरी के रूप में पर्याप्त मुआवजे की भी कमी है

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता पल्लवी शर्मा ने तर्क रखा कि उनकी मुवक्किलाओं को प्रदान मुआवजे को बढ़ाकर 50-50 लाख रुपये किया जाए। उन्होंने कहा दोनों बहनों के परिवार में 12 सदस्य हैं और वे मात्र 20 हजार रुपये प्रति माह ही कमा पा रही हैं।


ऐसे में परिवार के सदस्य उनका इलाज भी नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में सरकार को अब तक इलाज व यात्रा पर खर्च राशि 15 लाख रुपये का भी भुगतान करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में एसिड और इस तरह के हमलों के खिलाफ सख्त कानून हैं, वहीं भारत में कानून लचर है। इतना ही नहीं कई मामलों में जीवित बचे लोगों और सर्जरी के रूप में पर्याप्त मुआवजे की भी कमी है।


जल्द ट्रायल नहीं हो पाता और कम मुआवजे के कारण इलाज नहीं हो पता। याचिका के अनुसार दोनों बहनें एक ब्यूटी पार्लर चलाती थीं और एक व्यक्ति उन्हें तंग करता था और उसने विवाह का प्रस्ताव रखा। उनके मना करने पर आरोपी ने उन पर 14 अक्तूबर 2009 को एसिड फेंक दिया। दोनों बहनें एसिड से 15-20 फीसदी झुलस गई थीं। दोनों की आंखें, दोनों हाथ, दोनों कंधे, सीना और पेट सहित उनके चेहरे पर असर हुआ। निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को वर्ष 2010 में बरी कर दिया था।
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