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विपरीत परिस्थितियों में उठ खड़ी हुई तेजाब पीड़िता

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तुम हंसोगे तो सारी दुनिया तुम्हारे साथ हंसेगी, तुम रोओगे तो ये दुनिया और जोर से हंसेगी। इसीलिए मैंने दुनिया को अपने ऊपर हंसने का मौका नहीं दिया। यह कहना है तेजाब हमले का शिकार हुई फरीदाबाद की आरती पंचाल (नाम परिवर्तित) का। तीन साल पहले हुए तेजाब हमले की भयावह यादों को भूल चुकी आरती दृढ़ निश्चय के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर तेजाब पीड़िताओं के हित में काम करना चाहती है।
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तब हाईस्कूल की छात्रा आरती 11 मार्च 2012 को साइंस का पेपर देकर खुशी-खुशी लौट रही थी। किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा, जैसे ही वह पलटी उसने तेजाब की बोतल उस पर उड़ेल दी। जलन और दर्द से छटपटाती आरती को जब होश आया तो वह अस्पताल मेें थी। उस दिन को याद करते हुए आरती के चेहरे पर कई भाव तो आते हैं लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज आंखें उनके हौसलों को बयान करती हैं।
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घटना के बाद दर्द, हताशा और दुखभरी थी जिंदगी

घटना के बाद दर्द, हताशा और दुखभरी जिंदगी से गुजरने वाली आरती कहती हैं कि एक साल तक तो ऐसा महसूस होता रहा, जैसे सब कुछ खत्म हो गया। राजमिस्त्री पिता ने बेटी को ऐसा संबल दिया कि 2013 में ही उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और दसवीं कक्षा 94 प्रतिशत नंबरों के साथ पास र्हुइं। हरियाणा बोर्ड से इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही आरती कहती हैं कि तेजाब किसी भी लड़की की जिंदगी तबाह कर देता है। अगर तेजाब डालने वाले का यही मकसद था तो वह कभी पूरा नहीं होगा।

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर अपनी ही जैसी पीड़िताओं को साथ में लेकर उन्हें आर्थिक रूप मेें मजबूत बनाने का संकल्प उन्होंने लिया है। वह मोहल्ले की लड़कियों को मुफ्त पढ़ा रही हैं। अब उनका मकसद लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा करना हो गया है ताकि वह किसी भी विपरीत परिस्थिति में भी किसी के सामने झुकने या टूटने को मजबूर न हों।
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