तिहाड़ और रोहिणी जेल में बंद कैदियों की गुटबाजी को खत्म करने के लिए और बड़े मामलों के आरोपी एक साथ एक ही जेल में बंद न हों इसके लिए तिहाड़-प्रशासन ने अब कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार जेल की संख्या तय करने का निर्णय लिया है।
इसी माह के आखिर तक कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार जेल की संख्या तय होने की उम्मीद है। हालांकि महिला जेल और सजायाफ्ता कैदियों की जेलों में किसी तरह के बदलाव का प्रस्ताव नहीं है। वर्ष-2004 तक तिहाड़ में कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार ही जेल संख्या तय की जाती थी।
आदतन अपराधी किस्म के कैदियों की गुटबंदी को तोड़ने और जेल में बंद कैदियों के बीच बार-बार हो रहे हिंसक झड़पों को देखते हुए तिहाड़-प्रशासन ने तय किया है कि एक ही मामले में बंद कैदियों को एक-दूसरे से दूर रखने के लिए उन्हें अलग-अलग जेल में रखा जाए।