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एबीडब्ल्यू के मानेसर प्रोजेक्ट में अटके हैं 1400 निवेशकों के 800 करोड़

Sat, 29 Dec 2018 03:10 AM IST
vivek shukla ब्यूरो, अमर उजाला, गुरुग्राम
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मानेसर जमीन घोटाला मामले में मैसर्स एबीडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद अब निवेशकों की नजरें प्रोजेक्ट पर लगी हुई हैं। वर्ष 2008 में मानेसर स्थित एबीडब्ल्यू आदित्य निकेतन प्रोजेक्ट में 1400 निवेशकों ने 800 करोड़ का निवेश किया था, लेकिन आज तक इस प्रोजेक्ट से पैसे वापस लेने के लिए वे दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं। जिला उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल और प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें इंसाफ का इंतजार है।

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प्रोजेक्ट की लांचिंग साल 2009 में की गई थी, जबकि अभी तक यहां निर्माण के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगी है। इस वजह से करीब 1400 निवेशक परेशान हैं। सोसायटी के पूर्व प्रधान अब्दुल रहमान के अनुसार एबीडब्ल्यू बिल्डर को 104 एकड़ में टाउनशिप बनानी थी। उसने खरीददारों से करीब 800 करोड़ रुपये ले लिए, लेकिन मौके पर कोई काम नहीं किया। एक अन्य निवेशक समीर चड्ढा का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाकर सबसे बड़ी भूल हुई।

खरीददार बिल्डर, सरकार व किसानों के बीच पिस रहे हैं। इस मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने जांच भी की थी, जिसमें बिल्डर को दोषी ठहराया गया था, लेकिन इसमें कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमारे घर बनाकर दिए जाएं या हमारे पैसे लौटाए जाएं।  पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के कार्यकाल में साल 2004 से 2007 के बीच मानेसर, नखड़ौला व नौरंगपुर गांव के करीब 100 किसानों की 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण का डर दिखाकर बिल्डरों को सौंपी गई थी, लेकिन करीब 10 साल में 50 एकड़ जमीन पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।
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जबकि 350 एकड़ जमीन अभी भी खाली हैं। इसमें एबीडब्ल्यू आदित्य निकेतन प्रोजेक्ट की जमीन भी वीरान पड़ी है। मानेसर जमीन घोटाले में शिकायतकर्ता रहे ओमप्रकाश ने बताया कि 21 मई 2015 के बाद से बिल्डरों द्वारा निर्माण की गई बिल्डिंग पूरी तरह खाली पड़ी हैं। 

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