श्रीनिवास के मुताबिक, 11 साल के बाद छात्रसंघ चुनाव में सर्वाधिक 68 फीसदी मतदान हुआ था। स्कूल ऑफ साइंसेज में रिकार्ड मतदाताओं ने वोट दिया है। वामपंथी संगठनों को डर था कि एबीवीपी स्कूल ऑफ साइंसेज में बढ़त ले सकता है। इसीलिए चुनाव आयोग के माध्यम से उसी सेंटर के मतगणना बूथ से उन्हें बाहर रखा गया।
24 अक्तूबर 2008 में जेएनयू के छात्रों ने अदालत में याचिका दायर कर छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को पूरा न करने की बात रखी थी। इसी के चलते 2008 से 2012 तक जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगी थी।