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JNUSU Election 10 साल बाद फिर विवादों में घिरा, इस वजह से अदालत जाएगी एबीवीपी

Sun, 16 Sep 2018 05:38 AM IST
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के दौरान एबीवीपी एजेंट को मतगणना बूथ से बाहर रखने के मामले में अब संगठन अदालत का रुख करेगा। दरअसल एबीवीपी इसे लिंगदोह कमेटी के नियमों का उल्लंघन मान रही है। इसी के तहत कानूनी विशेषज्ञों से बात करने के बाद अदालत में याचिका दायर की जाएगी। इससे पहले जेएनयू में वर्ष 2008 के दौरान ऐसे ही एक मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चार साल तक चुनाव पर रोक लगा दी थी।  

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एबीवीपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्रीनिवास के मुताबिक, जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में मतगणना के  दौरान छात्र संगठन के एजेंट को मतगणना बूथ से  दूर रखना उनके अधिकारों का हनन है। जेएनयू चुनाव आयोग ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन किया है। अदालत के समक्ष लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों की अनदेखी करने के तहत कार्रवाई की मांग भी करेगी। इसके लिए बाकायदा कानूनी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।

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2008 से 2012 तक नहीं हो सके छात्रसंघ चुनाव 

श्रीनिवास के मुताबिक, 11 साल के बाद छात्रसंघ चुनाव में सर्वाधिक 68 फीसदी मतदान हुआ था। स्कूल ऑफ साइंसेज में रिकार्ड मतदाताओं ने वोट दिया है। वामपंथी संगठनों को डर था कि एबीवीपी स्कूल ऑफ साइंसेज में बढ़त ले सकता है। इसीलिए चुनाव आयोग के माध्यम से उसी सेंटर के मतगणना बूथ से उन्हें बाहर रखा गया।  

24 अक्तूबर 2008 में जेएनयू के छात्रों ने अदालत में याचिका दायर कर छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को पूरा न करने की बात रखी थी। इसी के चलते 2008 से 2012 तक जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगी थी।  
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