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Delhi NCR News: एबीवीपी ने की जेएनयू लाइब्रेरी मामले में दंडात्मक कार्रवाई की मांग

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-कहा-लाइब्रेरी की प्रवेश व्यवस्था को तोड़ना शर्मनाक और अराजकता
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जेएनयू ने डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में छात्र संघ के नेतृत्व में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम उखाड़ने की घटना की निंदा की है। साथ ही प्रशासन से कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। एबीवीपी के अनुसार वामपंथी नेतृत्व वाले छात्र संघ का एकमात्र उद्देश्य विश्वविद्यालय के माहौल को अशांत और छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों को बलपूर्वक बाधित करना है। लाइब्रेरी की प्रवेश व्यवस्था को तोड़ना शर्मनाक और अराजकता है।

एबीवीपी जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि प्रशासन को इस घटना पर न केवल तत्काल संज्ञान बल्कि लाइब्रेरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए जिम्मेदार तत्वों की पहचान कर कठोरतम कार्रवाई करनी चाहिए। वामपंथियों की यह हरकत सीधे-सीधे छात्रों के अधिकारों का हनन है। ऐसे उपद्रवियों को विश्वविद्यालय के भीतर शैक्षणिक संसाधनों और राजनीतिक पदों तक किसी भी प्रकार की पहुंच नहीं मिलनी चाहिए।
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एबीवीपी हमेशा इस बात पर जोर देती है कि किसी भी नीति या व्यवस्था को लागू करते समय छात्रों की राय को प्राथमिकता दी जाए। लेकिन संवाद की कमी का समाधान हिंसा नहीं है। यह बात वामपंथी संगठनों को समझनी चाहिए। एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि छात्रों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और अध्ययन-अनुकूल वातावरण के लिए हमेशा संघर्षरत रहेगी।
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वामपंथी तत्वों द्वारा की गई यह हिंसा सिर्फ एक गेट या मशीन की तोड़फोड़ नहीं है बल्कि यह विश्वविद्यालय की पहचान, उसकी शैक्षणिक परंपरा और छात्रों के भविष्य पर हमला है। इस घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में प्रशासन ऐसी किसी भी व्यवस्था को लागू करने से पहले औपचारिक रूप से पूरे छात्र समुदाय से संवाद स्थापित करे। विश्वविद्यालय को राजनीतिक अराजकता का नहीं बल्कि ज्ञान, शोध और शैक्षणिक स्वतंत्रता का केंद्र बने रहना चाहिए और इसके लिए हिंसा करने वाले समूहों पर निर्णायक कार्यवाही समय की मांग है।
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