इसके बाद राहुल सिंघानिया और गुनगुन डोगरा ने उन्हें सेक्टर-45 स्थित आम्रपाली सोसायटी के अपने घर में बुलाकर एक लाख रुपये नकद बुकिंग के तौर पर ले लिए। इसके बाद नौ लाख रुपये छह मई 2015 को आरोपियों ने आरटीजीएस के जरिए नरेश गर्ग से ले लिए।
नरेश को भरोसा दिलाने के लिए कुणाल डोगरा ने उन्हें अपने एक्सिस बैंक के खाते का 10 लाख रुपये का एक चेक भी दिया। उसने नरेश गर्ग से कहा कि वह उन्हें ये चेक सिक्योरिटी के तौर पर दे रहा है। अगर उनका फ्लैट नहीं मिलता है तो वह जब चाहें बैंक में चेक लगा अपने रुपये निकाल सकते हैं।
एफआईआर में नरेश ने आरोप लगाया है उनसे रुपये लेने के बाद आरोपी गायब हो गए। वह आरोपियों को तलाशने के लिए उनकेऑफिस और घर पहुंचे लेकिन कोई नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कुणाल द्वारा दिया गया चेक अपने खाते में कैश करने के लिए लगाया।
वह चेक बाउंस हो गया। काफी दिनों तक वह आरोपियों से रुपये मिलने की आस में इधर-उधर के चक्कर काटते रहे। अब उन्होंने मामले में थाना सेक्टर-39 में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बताया जा रहा है कि कुणाल डोगरा अप्रैल 2018 में ही जमानत पर छूटकर जेल से बाहर निकला है। उसकी पत्नी गुनगुन डोगरा ने गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। वह स्टे भी अब खत्म हो चुका है।
सुरेन्द्र डोगरा और राहुल सिंघानिया अब भी गौतमबुद्धनगर की लुक्सर जेल में बंद हैं। अब नई एफआईआर दर्ज होने के बाद कुणाल और गुनगुन डोगरा पर फिर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
30 जनवरी 2017 को एसटीएफ ने किया था गिरफ्तार
कुणाल डोगरा, उसके पिता सुरेन्द्र डोगरा, पत्नी गुनगुन डोगरा और राहुल सिंघानिया के खिलाफ नोएडा के थाना सेक्टर-39 व 58 में पहले से दो मामले दर्ज हैं। दिल्ली में भी इनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज है। 30 जनवरी 2017 को यूपी एसटीएफ ने कुणाल और उसके पिता सुरेन्द्र डोगरा को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे स्थित महामाया फ्लाई ओवर के पास से गिरफ्तार किया था। उस वक्त पूछताछ में बाप-बेटे ने एसटीएफ को 12 लोगों से ठगी करने की बात बताई थी। कुणाल ने वर्ष 2014 में नोएडा में रहने वाले अपने स्कूल के दोस्त निपुण बंसल से भी 39 लाख रुपये की ठगी की थी।