कैंप में बड़े आतंकी हमले और बम धमाके करने की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद नवंबर 2007 में चौरल-इंदौर, मध्यप्रदेश में दूसरे कैंप का आयोजन किया गया। इसके बाद दिसंबर 2007 में केरल के वागमॉन में तीसरा कैंप का आयोजन हुआ।
बाद में हलोल, गुजरात में जनवरी 2008 में चौथे कैंप का आयोजन किया गया। इन कैंप में फिजीकल ट्रेनिंग, साइकोलॉजिकल ट्रेनिंग, पहाड़ पर चढने, तैरने, मैप रीडिंग, पिस्टल फायरिंग और बम बनाने की ट्रेनिंग दी गई।
कैंप के मुख्य आयोजक व ट्रेनर सफदर और तौकीर रहे। कैंप में जिहाद का पाठ पढ़ाया जाता था। सफदर की गिरफ्तारी के बाद वह सिमी का मुखिया बन गया।
बाद में मई-जून 2008 में तौकीर ने रियाज भटकल और अन्य लोगों से पुणे में मुलाकात की। वहां उसने अपने बम ब्लास्ट करने की साजिश और अपने जिहादी सदस्यों की जानकारी भटकल को दी। इसके बाद 26 जुलाई 2008 में अहमदाबाद मेें बम विस्फोट कर दिया गया।
तौकीर 15-16 साल की उम्र से ही जिहादी विचारधारा से प्रभावित हो गया था। पढ़ाई करने के साथ उसके मन में जिहाद को लेकर ख्याल चलते रहे।
1999 में नौकरी छोड़कर वह सिमी से जुड़ गया। धीरे-धीरे वह आतंक की गतिविधियों में शामिल हो गया। उसकी कट्टर गतिविधियों के लिए लोग उसे भारत का ओसामा बिन लादेन कहने लगे।
उसकी तकनीक और योग्यता ने उसे और भी मजबूत कर दिया। यहां तक की आतंकी भी उसे भारत का ओसामा के नाम से जानने लगे।