आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस व पुलिस कमिश्नर पर हमला बोला। सीपी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए पार्टी ने कहा कि पैसा लेकर पुलिस आनंद पर्वत मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।
आप के मुताबिक, पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते वक्त आरोपियों का पक्ष लिया। इस मामले में पूछताछ के लिए आरोपी को रिमांड पर लेने की भी जहमत नहीं उठाई।
ईस्ट पटेल नगर स्थित आप कार्यालय पर दिल्ली प्रदेश संयोजक दिलीप पांडेय ने मीडिया से कहा कि मीनाक्षी की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस की लापरवाही बेहद गंभीर है।
पुलिस ने नहीं दिखाई कोई संजीदगी
पीड़ित लड़की की मां ने 25 बार पीसीआर काल की, लेकिन पुलिस ने संजीदगी नहीं दिखाई। पुलिस ने इसे मामूली घटना कहकर टाल दिया। फिर, मृतका के परिवार को एफआईआर की कॉपी तक नहीं दी गई।
वहीं, सरेराह हुए इस जघन्य अपराध में पुलिस को कोई प्रत्यक्षदर्शी तक नहीं मिला। इसके अलावा एफआईआर में धारा 302, 324, व 34 का जिक्र है, लेकिन नाम सिर्फ एक आरोपी का दर्ज है।
पांडेय ने सवाल कि मीडिया को प्रत्यक्षदर्शी मिल जाते हैं, लेकिन पुलिस को यह नहीं मिलते। दिलीप पांडेय ने बताया कि दिल्ली सरकार ने जब पीड़ित परिवार को कुछ आर्थिक मदद की बात कही तो सीपी बीएस बस्सी जी ने कहा कि 5 लाख मुआवजा देने के लिए उनके पास 500 की लिस्ट और है।
आशुतोष ने पुलिस को कहा निकम्मा
पांडेय ने सवाल किया कि बस्सी के लिए इंसानी जान की कीमत 5 लाख है? आखिर इतनी संवेदनहीनता क्यों? क्या दिल्ली की जनता अपनी रक्षक पुलिस से यही आशा करती है?
दूसरी तरफ आप नेता आशुतोष ने पुलिस को निकम्मा बताते हुए कहा कि इतने जघन्य अपराध पर संजीदगी की जगह दिल्ली पुलिस का रवैया बेहद तकलीफदेह है।
पुलिस कमिश्नर कह रहे हैं कि मामले में मीनाक्षी ने पहले आरोपियों को उकसाया। यह बेहद शर्मनाक है। इससे साफ है कि दिल्ली पुलिस की किसी के प्रति जवाबदेही नहीं है। मामले में पूरी तरह से लीपापोती हो रही है।