दिल्ली में सरकार बनाने की पूरी बहस एक झटके में ही खरीद-फरोख्त और भाजपा की बदनामी में बदल गई। देश की राजनीति में आए इस भूचाल का कारण शेर सिंह डागर का वह स्टिंग ऑपरेशन है जिसमें उन्हें विधायकों की खरीद के लिए डील करते हुए दिखाया गया है।
इस टेप में डागर आम आदमी पार्टी के नेता से चार करोड़ रुपये में डील करते हुए दिखाई देते हैं। इस फिल्म ने भापजा के पूरे किए-कराए पर पानी फेर दिया है। भाजपा किसी भी हालत में फिलहाल दिल्ली में चुनाव नही चाहती।
लेकिन डागर की इस एक गलती ने दिल्ली में चुनाव की संभावनाओं को अब निश्चित कर दिया है। जबकि दिल्ली के उप-राज्यपाल ने केंद्र को भेजी अपनी सिफारिश में मांग की है कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
एलजी ने अपनी सिफारिश में दिल्ली में चुनाव कराने की बात को अंतिम विकल्प बताया है। लेकिन डागर के इस स्टिंग ने एलजी के अंतिम विकल्प को ही सबसे मजबूत बना दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में दिल्ली में चुनाव ही एक मात्र विकल्प बनता दिख रहा है।
दिल्ली में चुनाव ही अब अंतिम विकल्प क्यों बन गया है, अंग्रेजी न्यूज पोर्टल फर्स्ट पोस्ट ने इसके पांच कारण बताए हैं। आगे जानिए वह पांच कारण...
सबसे बड़ा सवाल, कैसे साबित होगा बहुमत
पहला कारण: सुप्रीम कोर्ट आम आदमी पार्टी की इस बात पर सहमति जता सकती है जिसमें उन्होंने कहा कि फिलहाल दिल्ली में किसी भी पार्टी के पास सरकार बनाने का बहुमत नहीं है। उनका स्टिंग भी इस बात की पुष्टि करता है कि सरकार बनाने के लिए पार्टियां जोड़-तोड़ की कोशिश में लग गई हैं।
भाजपा के स्टिंग ने न सिर्फ उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया है बल्कि, डागर को कारण बताओ नोटिस जारी करना और तीन दिनों में उनसे जवाब मांगने की बात भी आम आदमी पार्टी के इस दावे को ही मजबूती प्रदान करती है।
इन विपरीत हालातों में दिल्ली के एलजी के लिए भी यह साबित करना मुश्किल होगा कि आखिर कैसे सबसे बड़ी पार्टी यानि बीजेपी सदन में अपना बहुमत साबित करेगी।
कमोबेस ऐसी ही परिस्थिती दिसंबर में भी थी। उस समय भाजपा ने साफ तौर पर सरकार बनाने से इंकार कर दिया था। पार्टी का कहना था कि सरकार बनाने के लिए उनके पास जरूरी बहुमत नहीं है। फिर अब वह बहुमत का इंतजाम कैसे करेगी यह एक बड़ा सवाल है।
विधायकों के बिकने की संभावना खत्म
दूसरा कारण: डागर एपिसोड के बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी दिल्ली में सरकार बनाने के इरादे को छोड़ने का आदेश दे सकते हैं। मोदी के अब तक के राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा हथियार भ्रष्टाचार ही रहा है।
ऐसे में अगर दिल्ली में किसी राजनीतिक जोड़-गणित से भाजपा की सरकार बनती भी है तो इससे पार्टी के दोनों बड़े नेताओं के दावे पर सवाल खड़ा हो सकता है। दिल्ली की सीट पाने के लिए पार्टी अपनी इमेज के साथ समझौता करने का जोखिम नही उठाना चाहेगी।
तीसरा कारण: आम आदमी पार्टी के इस स्टिंग ने उन विधायकों के सपनों पर भी पानी फेर दिया है जो पार्टी बदलने या बिकने के लिए तैयार थे।
इस ऑपरेशन के बाद भाजपा दोबारा आम आदमी पार्टी या कांग्रेस के विधायकों को खरीदने की हिमाकत नहीं करेगी। इस बारे में अरविंद केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि उनके पास अभी और भी टेप हैं जिनमें विधायकों के खरीद-फरोख्त का खुलासा होगा।
जनता भी सुना चुकी है फैसला
चौथा कारण: इस पूरे खेल में कांग्रेस भले ही सबसे छोटी पार्टी दिख्ाती है लेकिन, दिल्ली में किसी भी पार्टी के लिए सरकार बनाने में उनका यही नंबर सबसे बड़ा रोड़ा है।
दिल्ली चुनाव के बाद आप की सरकार बन सकी क्योंकि, कांग्रेस ने उसे समर्थन दिया। लेकिन अब भाजपा को वैसा ही फायदा पहुंचाने की गलती कांग्रेस नहीं करना चाहेगी।
हाल ही में हुए उपचुनावों ने कांग्रेस के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और वह चुनाव में जाने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है।
पांचवा कारण: विभिन्न संस्थाओं द्वारा कराए गए जनमत सर्वेक्षण में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि दिल्ली की जनता भी चुनाव के ही पक्ष में है।
टीओआई के सर्वेक्षण में दो तिहाई लोगों ने चुनाव के पक्ष्ा में ही अपनी सहमति दी थी। आप के स्टिंग के बाद अगर भाजपा सरकार बनाती है तो दिल्ली की जनता पर इसका नकारात्मक असर हो सकता है।