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AAP की सूची में जाति-धर्म का बोलबाला

Wed, 19 Feb 2014 11:06 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनसीआर की चांदनी चौक, वेस्ट दिल्ली, गुड़गांव, बागपत की सीटों पर प्रत्याशियों को जाति के आधार पर जिताऊ उम्मीदवार मानकर आप ने दांव खेला है। यह बात अलग है कि देश के चर्चित नामों में पूरी तरह से जातिगत फैक्टर नहीं देखा गया लेकिन 70 फीसदी सीटों पर इसका ध्यान पार्टी ने रखा है। हालांकि साफ छवि के लोग ही मैदान में उतारने का ध्यान आप ने रखा है।
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भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जन्मी आम आदमी पार्टी कहती रही है कि वह जाति की राजनीति नहीं करेगी। लेकिन आप की 20 उम्मीदवारों की पहली सूची में ऐसा नहीं दिखता है। ’84 के दंगों के चलते कांग्रेस से नाराज चल रहे सिख भाजपा व शिरोमणि अकाली दल के वोट बैंक माने जाते हैं।

आप की सरकार के एसआईटी का गठन करने के बाद सिख बाहुल्य क्षेत्र दिल्ली वेस्ट से जरनैल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर करीब 35 फीसदी वोटर सिख व पंजाबी हैं। सिख मुद्दे पर पत्रकार वार्ता में तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर जूता फेंककर सुर्खियों में रहने वाले जरनैल को पश्चिम दिल्ली से टिकट दिया है।
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दूसरे सिख फुलका को लुधियाना से मिला टिकट

इसके अलावा सिख दंगा पीड़ितों के केस सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट व लोअर कोर्ट में लड़ने वाले दिल्ली के एचएस फुलका को चुनाव लड़ने के लिए लुधियाना भेजा गया है।

समझा जा रहा है कि मूल रूप से बरनाला के रहने वाले फुलका को लुधियाना में करीब 35 फीसदी से अधिक सिखों को लुभाने के लिए भेजा गया है। हालांकि फुलका का कहना है कि मेरी पढ़ाई लिखाई लुधियाना से हुई है और मेरी पत्नी वहां लेक्चरर है।

22 फीसद वैश्य वोटरों को लुभाएंगे आशुतोष

कांग्रेस के दिग्गज कपिल सिब्बल के सामने चांदनी चौक से पूर्व पत्रकार आशुतोष को उतारकर यहां के 22 फीसदी वैश्य वोटरों को भी लुभाने की कोशिश की गई है।

आशुतोष हिंदी न्यूज चैनल, आईबीएन 7 के संपादक की कुर्सी को छोड़कर आप में शामिल हुए हैं। मूल रूप से यूपी के मिर्जापुर के आशुतोष की पढ़ाई दिल्ली के जवाहर लाल विश्वविद्यालय से हुई है।

35 प्रतिशत यादव वोटर को रिझाएंगे योगेंद्र यादव

गुड़गांव सीट पर भी करीब 35 फीसदी से अधिक यादव वोटरों को लुभाने की कोशिश करते हुए पार्टी के थिंक टैंक योगेंद्र यादव को पूर्व योजना के साथ उतारा गया है। हालां‌कि अमर उजाला से बात करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी उन्हें किसी और सीट से चुनाव लड़ाना चाहती थी। लेकिन उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने की इच्छी जताई थी। क्योंकि वह इस इलाके के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बेशक उनका पैतृक गांव रेवाड़ी में है, पर बचपन उनका गुड़गांव में बीता। इस संसदीय क्षेत्र का मेवात इलाका आजादी के बाद से उपेक्षित है। इसे देखकर यूपी के किसी पिछड़े क्षेत्र का आभास होता है।

मुरादाबाद में मुस्लिमों वोटरों पर है नजर

मुरादाबाद सीट पर भी कांग्रेसी सांसद अजहरुद्दीन के सामने आप ने खालिद परवेज को उतारकर इस सीट पर करीब 40 फीसदी मुस्लिम मतों को रिझाने की कोशिश की गई है।

परवेज पूर्व में जनता दल से भाग्य आजमा चुके हैं। कोल्ड स्टोरेज, रियल स्टेट व शिक्षण संस्थान व बीड़ी सहित विभिन्न उद्योग करने वाले खालिद परवेज की सियासी भूमि बदायूं भी रही है। वहां उन्होंने 1991 के विधानसभा चुनाव में जनता दल से भाग्य आजमाया, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई। बाद में उन्होंने 2002 में भी बदायूं से ही विधानसभा पहुंचने की जोरआजमाइश की,उसमें भी असफलता मिली।

2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बदायूं छोड़कर यहां शहर विधानसभा सीट से सपा से दावेदारी की थी। मूल रूप से अमरोहा जिले के रहने वाले परवेज वर्तमान में शहर में ही रहते हैं। सपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने नई सियासी पार्टी तलाशनी शुरू कर दी और आप के अस्तित्व में आने के साथ ही उससे जुड़ गए।
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जातिगत से इत्तर भी हैं कुछ नाम

सूत्र बताते हैं कि सप्ताह भर के भीतर जारी होने वाली आप की दूसरी सूची में भी जातिगत फैक्टर हावी रहेगा। इसको लेकर पार्टी के कर्ताधर्ता जिताऊ उम्मीदवार की गुणा-भाग में लगे हैं।

हालांकि मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव के सामने ईमानदार छवि के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बाबा हरदेव सिंह व उत्तरी पूर्वी मुंबई से मेधा पाटकर ऐसे नाम हैं जोकि जातिगत समीकरण में फिट नहीं होते। कुछ ऐसा ही फर्रुखाबाद व सहारनपुर सीट पर है। दूसरी ओर पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह का कहना है कि टिकट बंटवारे में पार्टी की तय प्रक्रिया को अपनाकर ही टिकट दिए गए हैं।

दूसरी ओर आप के टिकट बंटवारे पर कई स्थानों पर खिलाफत भी देखी जा रही है। गौतमबुद्धनगर व फरीदाबाद में तो प्रत्याशी की घोषणा से पहले ही नामों पर विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
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