पार्टी उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों के बजाय गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और मणिपुर जैसे छोटे-छोटे राज्यों में चुनाव लड़ना ज्यादा पसंद करेगी। इन सभी राज्यों में सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच रहता है और उसमें एक तीसरी पार्टी के लड़कर जीतने की संभावना ज्यादा होती है। इनमें संसाधन भी कम लगते हैं। इन सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव 2022 में होने हैं।
इसलिए दिल्ली पर था फोकस
इसके बाद ही केजरीवाल ने बाकी राज्यों का सपना छोड़ सिर्फ दिल्ली पर फोकस करने का फैसला किया था। उस समय वे केंद्र और उपराज्यपाल के खिलाफ राज्य सरकार के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे। एक साल पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया किस जमीन और पुलिस के अलावा किसी अन्य विषय की फाइल उपराज्यपाल के पास मंजूरी के लिए नहीं भेजी जाएगी। इसी के बाद केजरीवाल ने दिल्ली के विकास कार्यों को गति प्रदान की।
इसीलिए दिया राष्ट्र निर्माण का नारा
मंगलवार को दिल्ली चुनाव के नतीजे आने से पहले ही आप ने अपने राष्ट्रीय कार्यालय पर जुड़े राष्ट्र निर्माण के लिए बोर्ड लगाकर सदस्यता अभियान शुरू कर दिया था। मिस्ड कॉल के जरिए इस से 24 घंटे में 11 लाख लोग जुड़ चुके हैं।
गठबंधन में मुश्किल
आपका दूसरी पार्टियों के साथ सीटों का तालमेल कर लड़ना मुश्किल है क्योंकि कोई भी पार्टी अपनी सीटें इसे नहीं देना चाहती। सपा के नेता आपको दिल्ली जीत की बधाई तो देते हैं लेकिन कहते हैं कि इसका यूपी में स्वागत नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के नेता भी कहते हैं कि आप तो दिल्ली की पार्टी है और इसे वहीं लड़ना चाहिए।