वर्ष 2015 के दौरान दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जल बोर्ड का प्रभार दिया गया, मगर करीब एक साल बाद मंत्री बनाए गए कपिल मिश्रा को सिसोदिया की जगह जल बोर्ड का मंत्री बनाया गया, मगर उनको करीब तीन वर्ष बाद मंत्री से हाथ धोना पड़ा। जल बोर्ड के संबंध में बयानबाजी करने के कारण उनसे मुख्यमंत्री नाराज हो गए थे और उन्होंने मिश्रा को अपनी मंत्री परिषद से बर्खास्त कर दिया।
कपिल मिश्रा की बर्खास्तगी के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जल बोर्ड का प्रभार अपने हाथों में लिया। इस तरह उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए पहली बार किसी विभाग का प्रभार संभाला, मगर वर्ष 2020 में विधानसभा चुनाव के बाद दोबारा आप की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जल बोर्ड का प्रभार स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को दे दिया। जैन के गत वर्ष हवाला मामले में जेल जाने के बाद मुख्यमंत्री ने जल बोर्ड समेत उनके पास सभी विभाग उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दे दिए।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अन्य विभागों की तरह जल बोर्ड का प्रभार भी बखूबी संभाल रहे थे, मगर सात-आठ माह से उन पर आबकारी नीति के संबंध में आरोप लगने शुरू हुए और एक बार सीबीआई ने उनको पूछताछ के लिए बुलाया था। इससे पहले सीबीआई ने उनके घर व अन्य ठिकानों पर छापे मारे। इसके बाद से उनकी गिरफ्तारी के कयास लगाए जा रहे थे। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में घोषणा की थी कि मनीष सिसोदिया को सीबीआई गिरफ्तार करेगी। अब देखना है कि जल बोर्ड का प्रभार किस मंत्री को मिलेगा।