पिछले एक महीने से आम आदमी पार्टी के भीतर छिड़ी महाभारत और दो गुट बन जाने की बात पर सफाई देने के लिए जब आप के तीन बड़े नेता सामने आए तो एक के बाद एक कई खुलासे किए।
योगेन्द्र यादव ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से हमारे खिलाफ लगातार बयान दिए जा रहे हैं। बार-बार ये बात दोहराई जा रही है कि मुझे और प्रशांत जी को पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए।
योगेंद्र ने कहा कि हमारी महज पांच मांगे हैं कि जिसे पार्टी अगर मान लेती है तो हम किसी भी वक्त इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
पार्टी की किरकिरी पर बोले योगेंद्र
इन पांच मुद्दों के साथ ही यादव ने चार ऐसे गंभीर विषयों की पार्टी के आंतरिक लोकपाल से जांच कराने की मांग की है जिसके चलते लगातार पार्टी कि पिछले एक महीने से किरकिरी हो रही है।
लगातार पार्टी नेताओं को अपमानित कर कहा जा रहा है कि पार्टी भ्रष्ट हो गई है। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी भी उन राजनीतिक पार्टियों की तरह ही है जिन पर आरोप तो लगते हैं, लेकिन उनकी कोई जांच नहीं होती।
अब योगेंद्र बोले कि पार्टी को इन चार मु्द्दों की जांच आंतरिक लोकपाल से जरूर करानी चाहिए क्योंकि इनकी वजह से पार्टी की छवि खराब हो रही है।
कहा, दो करोड़ के चैक की हो जांच
पहला मुद्दा उस 2 करोड़ के चैक का है जिसको लेकर खासा बवाल हुआ है। मीडिया में यह तक खबर आई है कि पार्टी को गलत ढंग से चंदा मिल रहा है। यहां तक कि कहा गया कि ब्लैक मनी को व्हाइट करने काम आम आदमी पार्टी कर रही है।
योगेंद्र बोले कि पार्टी को चाहिए कि इन मुद्दों से निपटने का सीधा सा तरीका है कि पार्टी इस मु्द्दे की जांच कराए जिससे उनकी छवि साफ हो।
दूसरा मुद्दा जिसकी जांच दोनो नेता चाहते हैं वो ये है कि विधानसभा चुनाव के दौरान एक नेता पर अवैध शराब रखने और बांटने का आरोप लगा था उसकी भी जांच की जाए।
पूर्व मंत्री की डिग्री की भी हो जांच
आप की मौजूदा सरकार में विधि मंत्री पर भी ये आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी वकालत की डिग्री को गलत ढंग से हासिल किया। ऐसे में पार्टी को इस मामले की जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
पिछले साल फरवरी में जब आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था उसके बाद पार्टी पर लगातार ये आरोप लगा था कि आप दोबारा से सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विधायकों को तोड़ रही है।
इस बारे में कांग्रेस के एक नेता ने स्टिंग भी जारी किया था। इसके साथ ही पार्टी की ही एक बड़ी नेता अंजलि दमानिया ने इस्तीफा देते हुए इस मामले पर जवाब भी मांगा था। फिर भी इसकी जांच नहीं हुई। ऐसे में पार्टी को इस मामले की भी आंतरिक लोकपाल से जांच करानी चाहिए। ऐसा योगेंद्र यादव का कहना है।