केंद्र और उपराज्यपाल के साथ चल रही दिल्ली सरकार की जंग ने आम आदमी पार्टी (आप) को भी फाइट मोड में ला खड़ा किया है। पार्टी बड़े स्तर पर इस लड़ाई को आम लोगों के बीच ले जाने की तैयारी में है।
इस दौरान पार्टी की कोशिश यह साबित करने की होगी कि केंद्र सरकार का दिल्ली सरकार के साथ अपनाया जा रहा रवैया गलत है। इसके लिए सभी संभव तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
दरअसल, केंद्र और राज्य सरकार के बीच अधिकारों के बंटवारे पर बहस छिड़ी है। केंद्र की ओर से जारी नोटिफिकेशन को पार्टी समेत उसकी सरकार खारिज कर चुकी है। दिल्ली विधानसभा में भी इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित हो चुका है।
हर दांव-पेंच आजमाएंगे केजरीवाल
अब पार्टी इसे आम लोगों के बीच ले जाएगी। बताया जाएगा कि केंद्र सरकार दिल्ली के जनमत को उजागर करने वाले दिल्ली विधानसभा के प्रस्ताव को भी मानने से इनकार कर रही है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापानी पार्क रैली के उस वादे को भी दिखाया जाएगा, जिसमें उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था। कोशिश होगी कि हर बहस पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द घूमती दिखे।
इसके लिए नुक्कड़ सभाओं से लेकर सोशल मीडिया तक का पूरा इस्तेमाल किया जाएगा। दिल्ली सरकार को अधिकार दिलाने से शुरू हुई बहस पंजाब चुनाव में कारगर साबित हो सकती है। उस वक्त चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र्र मोदी से टक्कर लेते दिखेंगे।
इन पर होंगे तीखे हमले
इससे भाजपा के खिलाफ जाने वाले वोटों को ध्रुवीकरण आप के हक में लाने में सहूलियत रहेगी। आप के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना भाजपा का अहम चुनावी वादा रहा है।
लेकिन एक साल बीतने के बाद भी संसद में इससे जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया है। इसके उलट दिल्ली सरकार को पहले मिले अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
इसके अलावा देश भर में असर डालने वाले भूमि अधिग्रहण, एफडीआई जैसे दूसरे मसलों पर भी केंद्र सरकार अपने वादे से मुकर रही है। पार्टी इसका हर स्तर पर विरोध करेगी।