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दिल्ली सरकार की योजना, झुग्गी वालों को एक लाख 42 हजार में फ्लैट

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आम आदमी पार्टी की सरकार के शपथ लेने के दिन तक दिल्ली में बसी झुग्गी को बिना पुनर्वास नहीं हटाया जाएगा। उसके बाद बसी झुग्गी को हटाया जाएगा। भविष्य में नई झुग्गी नहीं बने, इसके लिए हर तीन महीने में सेटेलाइट मैप लिए जाएंगे।
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एजेंसी के साथ संयुक्त सर्वे और झुग्गी बस्ती में जासूस वॉलेंटियर्स पंजीकृत किए जाएंगे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डुसिब) की बैठक में बुधवार को दिल्ली स्लम व जेजे पुनर्वास नीति 2015 को मंजूरी दे दी गई।

दिल्ली सरकार की पॉलिसी में पहले ऐसे झुग्गी वालों को पुनर्वास के योग्य मानने का प्रावधान था, जो 4 जून 2009 तक रहता हो। इसे बदलकर 14 फरवरी तक बनी झुग्गी को योग्य माना जाएगा। इसी तरह से पुरानी पॉलिसी में 15 साल तक लीज पर फ्लैट दिए जाने का प्रावधान था, जिसे घटाकर 10 साल कर दिया गया है।
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फ्लैट ना तो किराए पर दे सकेगा और ना ही बेच सकेगा

पुनर्वास के योग्य झुग्गी मालिक को 1.12 लाख रुपये की हिस्सेदारी 25 वर्गमीटर केफ्लैट के लिए देनी होगी। साथ ही 30 हजार रुपये पांच साल का रखरखाव करने के लिए डुसिब एस्टेट मैनेजमेंट फंड में जमा कराने होंगे। पांच साल के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी वहां के आरडब्ल्यूए को सौंप दी जाएगी।

पॉलिसी के अनुसार आवंटन के दस साल तक किसी दूसरे को फ्लैट ना तो किराए पर दे सकेगा और ना ही बेच सकेगा। दस साल बाद फ्लैट फ्री होल्ट कराया जा सकेगा। आवंटन पति-पत्नी के नाम पर संयुक्त रूप से होगा।

इसी तरह इन-सिटी पुनर्वास में डीडीए की कठपुतली कॉलोनी में प्राइवेट बिल्डर को जिस शर्त पर पुनर्वास का काम दिया है, उस मॉडल पर सरकार अन्य एजेंसी की जमीन पर बनी झुग्गी का पुनर्वास करेगी।
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रेलवे को भी पॉलिसी भेजी गई थी

एक अन्य मॉडल में 60 फीसदी जमीन पर पुनर्वास करने के अलावा 40 फीसदी जमीन संबंधित एजेंसी को दी जाएगी। लेकिन निर्माण खर्च जमीन स्वामित्व एजेंसी को उठाना होगा। पॉलिसी में नोडल एजेंसी डुसिब होगी। सड़क, फुटपाथ या गली अतिक्रमण के मामले में झुग्गी को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।

यहां संबंधित जमीन की एजेंसी को सर्किल रेट के हिसाब से डुसिब को भुगतान करना होगा। बोर्ड ने 5 अक्तूबर 2015 की मीटिंग में भी पॉलिसी पर चर्चा की थी, लेकिन उस दिन शहरी विकास मंत्रालय के प्रतिनिधि ने पॉलिसी के अध्ययन करने के बाद सुझाव की बात रखी थी। प्रस्ताव रोका गया था।

रेलवे को भी पॉलिसी भेजी गई थी। दोनों जगह से पॉलिसी को लेकर अभी तक टिप्पणी नहीं आई है। पुनर्वास का काम रुका हुआ है। यही वजह है कि पॉलिसी को स्वीकृति इस शर्त पर दे दी गई कि भविष्य में जो टिप्पणी आएगी, उसमें विचार-विमर्श के बाद जिन मामलों में सहमति बनेगी, उसे शामिल करेंगे।

दिल्ली सरकार के अनुसार दिल्ली शहरी आश्रय सुधार अधिनियम-2010, दिल्ली कानून राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (विशेष प्रावधान अधिनियम, 2011) दिल्ली 2021 के मास्टर प्लान, उच्चतम न्यायालय और सुदामा केस के फैसलों पर पॉलिसी बनाई गई है।
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