मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी की सरकार अब केंद्र और उपराज्यपाल की तरफ से गैर कानूनी घोषित फैसलों को लेकर बैकफुट पर नजर आ रही है।
सोमवार को अचानक बैठक कर कैबिनेट ने उपराज्यपाल के सचिव की तरफ से 17 सितंबर को जारी मेमोरैंडम पर चर्चा की।
कैबिनेट ने फैसला किया कि दानिक्स अधिकारियों के समयबद्ध वेतन वृद्धि का लागू करने का आदेश टाल दिया जाए। साथ ही सीएनजी वाहन फिटनेस घोटाला जांच आयोग का मामला कोर्ट पर छोड़ दिया है।
दानिक्स अधिकारियों की समयबद्ध वेतन वृद्धि अभी नहीं होगी लागू
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, दिल्ली अंडमान निकोबार आईलैंड सिविल सर्विसेज (दानिक्स) की 18 साल पुरानी मांग दिल्ली सरकार ने पूरी की है।
अब उपराज्यपाल कार्यालय से नोट आया है तो नए ग्रेड पे और समयबद्ध वेतन वृद्धि का आदेश गृह मंत्रालय से अंतिम फैसला होने तक टाल दिया गया है।
वहीं, गृह मंत्रालय को पत्र लिख रहे हैं कि दानिक्स अधिकारियों के मामले में जल्द निर्णय लें। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने माना है कि सीएनजी वाहन फिटनेस घोटाला जांच आयोग मामला अभी दिल्ली हाईकोर्ट में है। सभी संबंधित एजेंसी कोर्ट का सम्मान करेगी।
LG को लेकर गृहमंत्रालय के आदेश का इंतजार करेगी सरकार
कैबिनेट ने फैसला किया है कि उपराज्यपाल लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को इस तरह का नोट कैसे भेज सकते हैं, इस पर केंद्र सरकार से सलाह लेंगे।
वहीं किसी कानून के तहत उपराज्यपाल सीधे दिल्ली सरकार के अधिकारियों को निर्देश दे सकते हैं और चुनी गई सरकार को किस नियम के तहत निर्देश जारी कर सकते हैं, इसपर भी सरकार गृह मंत्रालय से सलाह लेगी।
कैबिनेट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछने का फैसला किया है कि उपराज्यपाल को किस शक्ति के तहत चुनी गई सरकार के आदेश और सरकुलर को रद्द करने का अधिकार प्राप्त है?
मालूम हो कि, उपराज्यपाल नजीब जंग के सचिव एससीएल दास की तरफ से जारी नोट में मुख्य सचिव समेत सभी अधिकारियों को केंद्र सरकार की तरफ से गैर कानूनी व असंवैधानिक करार आदेश नहीं मानने को कहा गया था।
यहां तक कहा था कि जो अधिकारी ऐसे आदेश का पालन करेगा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और तनख्वाह भी काटी जाएगी।