दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पताल और डिस्पेंसरी के चिकित्सकों को मरीजों के लिए जेनेरिक सॉल्ट ही लिखने का आदेश दिया है। साथ ही चेताया कि किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक आदेश को व्यवहारिक नहीं मानते।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव एससीएल दास की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी चिकित्सक हर हाल में मरीजों को दवा के नाम पर जेनेरिक सॉल्ट ही लिखें। किसी भी कंपनी की ब्रांडेड दवा न लिखें।
तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश
आदेश की प्रति सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों और डिस्पेंसरी के मेडिकल ऑफिसर अथवा वहां के इंचार्ज को भेज दी गई है। तत्काल प्रभाव से इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कहा गया है। यह भी निर्देश है कि अपने-अपने अस्पताल और डिस्पेंसरी में हर हाल में सरकारी आदेश का पालन कराएं। इसमें कोताई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दरअसल, नए स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने पदभार संभालने के बाद कई अस्पतालों का दौरा किया था और मरीजों-चिकित्सकों से बातचीत की थी। बातचीत में पता चला कि सस्ती दवा तो अस्पताल में मिल जाती है, लेकिन मंहगी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती है।
सरकार जेनेरिक दवाओं के दुकाने भी खोल सकती है
अस्पताल के बाहर काफी संख्या में मेडिकल स्टोर को देखने के बाद चिकित्सकों से जेनेरिक दवा लिखने के लिए कहा गया था। दिल्ली सरकार के कुछ अस्पतालों में जेनेरिक दवा के लिए स्टोर भी खोले गए हैं। संभव है सरकार के इस आदेश के बाद अन्य अस्पतालों में भी जेनेरिक दवा की दुकान खुले।
हालांकि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कार्यरत कुछ चिकित्सकों का कहना है कि हर बीमारी में जेनेरिक सॉल्ट लिखना व्यवहारिक नहीं है।
ओपन हार्ट सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण सहित कुछ अन्य गंभीर बीमारियों में कई ऐसी दवाएं हैं, जिनकी गुणवत्ता काफी अच्छी है, लिहाजा उसमें जेनेरिक दवा लिखना मुश्किल होगा। कोई भी चिकित्सक अपने मरीज को बेहतर से बेहतर इलाज और दवा देना चाहता है।