आम आदमी पार्टी (आप) ने 4जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि तत्कालीन यूपीए सरकार के साथ मिलीभगत करके रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने 2010 में पिछले दरवाजे से टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश किया।
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खास बात यह कि इस दौरान सभी नियमों को अनदेखा किया गया। सीएजी रिपोर्ट के हवाले से आप ने एनडीए सरकार से मांग की है कि आरआईएल का लाइसेंस करने के साथ एफआईआर भी दर्ज करानी चाहिए।
आप के मुताबिक, इंफोटेल ब्रॉडबैंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (आईबीएसपीएल) नामक कंपनी को 2007 ने इंटरनेट का करोबार करने का लाइसेंस मिला था।
CAG रिपोर्ट का हवाला
2009-10 तक कंपनी का राजस्व महज 16.28 लाख था। जबकि कंपनी की शेयर पूंजी तीन करोड़ थी। 2010 में 4जी के लिए लाइसेंस का आवेदन इंफोटेल डिगीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (आईडीपीएल) ने दिया था, जिसका 99.99 फीसदी शेयर आईबीएसपीएल के पास था।
सीएजी रिपोर्ट के हवाले से आप का आरोप है कि 4जी का लाइसेंस मिलते ही आईबीएसपीएल ने अपने अधिकृत शेयर तीन करोड़ रुपये से बढ़ाकर छह हजार करोड़ रुपये कर दिए। लाइसेंस मिलने के एक हफ्ते के भीतर कंपनी ने अपना बड़ा हिस्सा आरआईएल को दे दिया गया। इस तरह आरआईएल पिछले दरवाजे से टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश कर गई। यह पूरी तरह गलत है।
इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि आरआईएल का टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश अनधिकृत है। पार्टी ने मांग की है कि एनडीए सरकार को तत्काल प्रभाव से 4जी स्पेक्ट्रम का आवंटन रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही एफआईआर दर्ज कराकर इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करानी चाहिए।
सितंबर से मिलेगी 4G स्पीड
नोएडा में रहने वाले लोग जल्द ही 4जी (फोर्थ जनरेशन) इंटरनेट की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। रिलायंस की ओर से टावर लगाने का काम अब अंतिम चरण में है। प्राधिकरण से मिली जानकारी के मुताबिक शहर में 4जी इंटरनेट नेटवर्क शुरू करने के लिए कुल 160 मोबाइल टावर लगने हैं।
इसमें से अब तक 120 से ज्यादा टावर लग चुके हैं। जबकि बाकी 40 टावर भी अगस्त तक लग जाएंगे। इसके बाद सितंबर में सभी टावरों को इंटर-कनेक्ट करके नेटवर्क शुरू कर दिया जाएगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर भी टावर लगे हैं। लिहाजा यहां से गुजरने पर भी आपको नेटवर्क की दिक्कत नहीं होगी।
सितंबर में 4जी नेटवर्क चालू होने के साथ ही नोएडा उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला शहर बन जाएगा, जहां यह सुविधा होगी। अभी तक दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, कोलकाता, चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, जालंधर, लुधियाना और जामनगर में ही 4जी सेवा संचालित की जा रही हैं।
12 गुना ज्यादा होगी स्पीड
फोर जी नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड है। थ्रीजी नेटवर्क पर अधिकतम 8 मेगाबिट प्रति सेकेंड (एमबीपीएस) इंटरनेट स्पीड होती है, जबकि फोर जी पर 100 एमबीपीएस तक स्पीड होगी। इतनी स्पीड मिलने पर ऑडियो, वीडियो और फोटो काफी कम समय में डाउन लोड कर सकते हैं।
दरअसल, फोर जी नेटवर्क लोकल एरिया नेटवर्क पर काम करता है, जिससे ज्यादा डाउनलोड करने पर भी इसकी स्पीड एक जैसी बनी रहेगी, जबकि थ्री जी वाइड एरिया नेटवर्क पर चलता है। इस नेटवर्क पर डाउनलोड के समय स्पीड कम हो जाती है।
4जी के टावर काफी ऊंचे हैं। प्राधिकरण ने रिलायंस से पहले ही करार किया था कि इन टावरों पर कैमरा भी लगाना होगा। इसके बाद सभी टावरों पर ये कैमरे भी लग रहे हैं। इससे हाई स्पीड इंटरनेट के साथ सुरक्षा के लिहाज से भी ये टावर काम करेंगे। इसका फायदा सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे पर होगा।
- अल्ट्रा ब्रॉड बैंड इंटरनेट ऐक्सेस, आईपी टेक्नोलॉजी, गेमिंग सर्विसेज, हाई डेफिनेशन मोबाइल टीवी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, 3डी टेलीविजन आदि का लुत्फ उठा सकेंगे। - हाई डेफिनेशन वीडियो बिना बफर किए देख सकेंगे। - जीएसएम और सीडीएमए का झंझट खत्म। एक स्टैंडर्ड पर करेगा काम। - एक स्टैंडर्ड के चलते रोमिंग में भी बरकरार रहेगी स्पीड। - ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होने से ग्राहकों को मिलेगी सस्ती सेवाएं। - ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम टेक्नोलॉजी पर भी बेहतरीन कवरेज।