आम आदमी पार्टी की मौजूदा कलह से बेशक पार्टी नेता परेशान हैं, लेकिन विवाद की तपिश भाजपा तक पहुंचने की उम्मीद है। विवाद शांत होने पर भाजपा दिल्ली विधान सभा में तीसरे पायदान तक जा सकती है। पार्टी सूत्रों की माने तो करीब 10 विधायक बागी नेता योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण के संपर्क में हैं। ये पार्टी के भीतर रहकर ही विरोधी सुर उठाते रहेंगे। ऐसे में आप ने बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों को पार्टी से बाहर किया तो इनकी संख्या भाजपा विधायकों से ज्यादा हो सकती है।
असंतुष्ट विधायकों की अगुवाई तिमारपुर के विधायक पंकज पुष्कर कर रहे हैं। टीम योगेंद्र की तरफ से 14 अप्रैल को होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए भेजे जाने वाले आमंत्रण पत्र में भी पुष्कर का नाम है। यही नहीं, विवाद शुरू होने के बाद से ही पुष्कर योगेंद्र यादव के साथ हैं। वहीं, बिजवासन से आप विधायक देवेंद्र सहरावत ने भी बगावत के संकेत दे दिए हैं। सहरावत ने आप की दिल्ली इकाई के खिलाफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से शिकायत की है। सहरावत ने इसमें खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
सूत्र बताते हैं कि आप के 67 में करीब 10 विधायक योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद से इन्होंने यादव खेमे में अपनी सुहानुभूति दिखाई है। अगर इन्हें पार्टी से बाहर किया जाता है तो सरकार की सेहत पर इससे फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन संख्या बल के हिसाब से विधानसभा में आप के बागी विधायकों का समूह भाजपा से बड़ा हो जाएगा। सभी विधायक नई पार्टी के बैनर तले विधानसभा में बैठेंगे।
बैठक में शिरकत करने वालों की संख्या बताई
14 अप्रैल की बैठक को सफल बनाने के लिए योगेंद्र यादव चंडीगढ़ व लखनऊ में आप कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने जा रहे हैं। योगेंद्र मंगलवार को चंडीगढ़ व बृहस्पतिवार को लखनऊ में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। वहीं, टीम का दावा है कि सोमवार दो बजे तक 95 एनआरआई के साथ 27 राज्यों के करीब 2400 लोगों ने संपर्क किया है। इसमें से 1400 लोग बैठक में शामिल होने को तैयार हैं। जबकि 500 से ज्यादा लोगों ने अभी तक फैसला नहीं किया है। वहीं, 400 लोगों ने मना कर दिया है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दिल्ली के आप नेताओं व कार्यकर्ताओं की है। योगेंद्र यादव के एक नजदीकी ने बताया कि अभी तो शुरुआत है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में संख्या तेजी से बढ़ सकती है।