मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त इलाज, बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा। अरविंद केजरीवाल की इस 'मुफ्त सरकार' को दोबारा चुनकर आने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए थी। लेकिन पिछले दस दिनों में दिल्ली का सियासी माहौल कुछ बदला सा दिख रहा है। अब आप भाजपा से एक कड़ी चुनौती का सामना कर रही है।
इसकी एक वजह भारतीय जनता पार्टी का आक्रामक चुनाव प्रचार तो है ही, वहीं दूसरी ओर अपनी पार्टी में भी केजरीवाल अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। खासतौर पर पिछले चुनाव में उनके सहयोगी रहे अधिकतर बड़े नेता उनका साथ छोड़ चुके हैं। यही नहीं बल्कि हर गली मोहल्ले में आम आदमी पार्टी की टोपी पहने दिखने वाले उनके वालंटियर भी इस बार किसी हद तक नदारद हैं।
इससे पहले हर चुनाव में आप के वालंटियर पूरे देश से दिल्ली आते थे और हर सड़क, हर गली, हर बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशन पर सिर्फ आप की टोपी लगाए लोग ही दिखाई देते थे। इससे आम आदमी पार्टी के पक्ष में एक माहौल बन जाता था। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के दिनों से शुरू होकर यह माहौल पिछले विधानसभा चुनाव तक रहा।