आम आदमी पार्टी (आप) ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के ऐलान को फर्जी करार देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार दिल्लीवासियों को गुमराह कर रही है।
आप नेता मनीष सिसोदिया के मुताबिक, दिल्ली चुनाव से पहले की जा रही यह कोशिश चुनावी स्टंट मात्र है। इससे दिल्लीवासियों का कोई भला नहीं होने जा रहा है।
सिसोदिया सोमवार को मीडिया से बात कर रहे थे। इस मामले में उन्होंने गंभीर सवाल भी खड़े किए। मनीष सिसोदिया ने बताया कि अनधिकृत कालोनियों को नियमित किए जाने को लेकर केंद्र सरकार गलत सूचनाएं फैला रही है।
केंद्र ने इस बारे में कोई अध्यादेश नहीं ला रही है। इसकी जगह केंद्रीय कैबिनेट ने चंद लाइनों का एक प्रस्ताव भर लाया है। इस मामले में पुराना इतिहास दुहराया जा रहा है।
एक बार फिर बेवकूफ बन रही है जनता
2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने प्रोविजनल सर्टीफिकेट तक जारी कर दिए थे। लेकिन अभी तक इन कालोनियों के निवासियों को मालिकाना हक नहीं मिला। इसी तरह मौजूदा केंद्र सरकार अब एक बार फिर दिल्ली वासियों को बेवकूफ बना रही है।
वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि अलग-अलग विभागों की जमीन पर बसी कालोनियों को नियमित करने के लिए लैंड यूज में बदलाव करना होगा। इसकी कोई जानकारी केंद्र सरकार ने नहीं दी है।
आप नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार केपास कोई रोडमैप नहीं है। इसकी जगह आम लोगों को धोखा देने के लिए नियमित करने का ऐलान किया जा रहा है।
आप की दलील
नियमित करने से पहले अनिधकृत कॉलोनियों के लैंड यूज में बदलाव करना होगा। इसके लिए डीडीए, एसआई, वन विभाग के लिए जमीनों से जुड़े प्रावधानों में बदलवा के लिए अलग-अलग संशोधन करने होंगे। केंद्र सरकार ने क्या अभी तक इस दिशा में कोई कदम उठाया है?
घर के मालिकों को मालिकाना हक देने से पहले भूमि के उपयोग से संबंधित कानून में परिवर्तन जरूरी है। केंद्र सरकार ने इस दिशा में क्या किया है?
क्या केंद्र सरकार गारंटी दे सकती है कि उसकी इस घोषणा से इन कालोनियों में बिजली पानी के अलावा दूसरी बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम कब तक हो सकेगा?
अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की उसकी घोषणा शीला दीक्षित सरकार से किस तरह अलग है? क्या सिर्फ पुराने प्रावधान की तारीख भर नहीं बदली गई है?
क्या शहरी विकास राज्य मंत्रालय बता सकता है कि इन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की दिशा में उसकी क्या पहल होगी ?
भूअधिग्रहण पर 'आप' तल्ख, किसानों का हक छीन रही सरकार
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में संशोधन करने की कोशिश पर वार किया है। आप का कहना है कि इससे ब्रिटिश जमाने के कानून को फिर से देशवासियों पर थोपा जा रहा है। इसका विरोध करते हुए आप ने चेतावनी दी कि संशोधन के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
आप नेता योगेंद्र यादव ने बताया कि लंबी लड़ाई के बाद पिछले साल भूमि अधिग्रहण कानून लाया गया था। इसमें प्रावधान था कि किसानों की रजामंदी के बगैर जमीन नहीं ली जा सकती। साथ ही जमीन अधिग्रहण करने से पहले न सिर्फ उसका सोशल बल्कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ा ऑडिट भी किया जाएगा। इस कानून ने किसानों को ताकत दी थी।
योगेंद्र यादव के मुताबिक, एनडीए सरकार एक बार फिर किसानों का हक छीन रही है। सरकार ने सोमवार को कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश लाया है। इससे कुछ मामलों में जमीन अधिग्रहण के लिए कानून को बाईपास किया जा सकता है।
इसमें रक्षा सुविधा व औद्योगिक कारीडोर का विकास, आवासीय सुविधा का विकास, ग्रामीण क्षेत्रों व सामाजिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास जैसे मामले शामिल हैं। यादव ने बताया कि इस बदलाव से देश में होने वाले ज्यादातर अधिग्रहण कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
वहीं, मनीष सिसौदिया ने बताया कि दिल्ली केसाथ इससे देश भर के किसानों को बड़ा नुकसान होने जा रहा है। पचास साल की लड़ाई के बाद पिछले साल बने कानून को बेकार कर दिया गया है। अब भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को लांघकर सरकार कंपनियों के हाथों में जमीन सौंपेगी। किसानों को इससे कोई फायदा नहीं होगा। जो गतिविधि पहले गुजरात में की गई, उसी को अब पूरे देश में लागू करने की कोशिश हो रही है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि अध्यादेश से केंद्र सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है। आप इसका हर स्तर पर विरोध करेगी।