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'पूर्व BJP विधायक की सभा के बाद हुआ दंगा'

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त्रिलोकपुरी में दो समुदायों के बीच बवाल को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को थोड़ी शांति के बाद सोमवार को एक बार फिर अफवाहें उड़ने लगीं। माहौल बिगड़ने से पहले ही प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं।
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ज्वाइंट सीपी के मुताबिक क्षेत्र में कर्फ्यू नहीं लगा है। उपद्रव करने वालों की धर-पकड़ चल रही है, जिसके चलते इलाके में आने-जाने वालों पर रोक लगी है।

दरअसल पूरे इलाके में धारा 144 पहले से ही लगी हुई है। रविवार रात गश्त के दौरान अचानक कुछ लोगों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया। इसके साथ ही अफवाहों का दौर भी शुरू हो गया।

शुक्रवार को शुरू हुए बवाल के बाद से इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात हैं। एक शोरूम के आग लगाने की घटना के बाद माहौल और बिगड़ गया, जिसके चलते लगातार पथराव और तोड़फोड़ की घटना सामने आ रही है।
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सुनील कुमार वैद्य ने की थी सभा

आम आदमी पार्टी ने त्रिलोकपुरी में हुई सामुदायिक हिंसा के लिए बीजेपी दोषी ठहराया है। बीजेपी पर आरोप लगाते हुए आप ने उसके पूर्व विधायक सुनील कुमार वैद्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आप का कहना है कि त्रिलोकपुरी में जो कुछ भी हुआ वो पूर्व नियोजित तरीके से हुआ ताकि धार्मिक आधार पर लोगों को बांट कर उसका राजनीतिक लाभ लिया जा सके।

आप के अनुसार उसके त्रिलोकपुरी और कोंडली के विधायक राजू ढिंगन और मनोज कुमार ने अपने क्षेत्रों में शांति और सौहार्द्र कायम करने की लगातार कोशिश की है। दोनों ने अपने क्षेत्रों में रात-रातभर घूमकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।

आप का कहना है कि उसके विधायकों ने त्रिलोकपुरी और आसपास के क्षेत्र के बारे में ग्राउंड रिपोर्ट दी है, जो बहुत ही चिंताजनक है। उनके अनुसार पूरी हिंसा राजनीतिक फायदे के लिए भड़काई गई है। इस सामुदायिक हिंसा को सोच-समझकर हवा दी गई और फैलने दिया गया।

आप की मांग है कि दिल्ली पुलिस त्रिलोकपुरी हिंसा मामले में बीजेपी के पूर्व विधायक सुनील कुमार वैद्य की भूमिका की जांच करे। आप इस जांच के समर्थन में यह कहती है कि इस बात की पुख्ता जानकारी है कि सुनील ने दीवाली की रात एक सभा की थी, जिसके बाद ही वहां दंगे भड़के थे।

कहां गए भड़काऊ सभा करने वाले लोग?

आप चाहती है कि इस बात की जांच हो कि दीवाली की रात ऐसी भड़काऊ सभा की क्या जरूरत थी और ऐसी सभा के बाद बीजेपी नेता की अध्यक्षता वाला वो समूह कहां गया?

आप का मानना है कि हालांकि पुलिस ने हिंसाग्रस्त इलाके में पुलिसबल बढ़ा दिया है पर अफवाह फैलाकर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाले तत्वों पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाले तत्वों को उनकी तह में खत्म कर देने की जरूरत है और बहुत देर होने से पहले प्रशासन को इसके लिए ठोस कदम उठाने की भी जरूरत है।

आप ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को दिवाली के आसपास ही चेताया था कि शहर के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक फसाद होने की संभावना है।

अब दिल्ली की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर सब बातों का अंदेशा होने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने कौन-कौन से कदम उठाए ऐसे फसादों को रोकने के लिए। आप ने ये भी पूछा है कि ऐसी सूचना होने का क्या फायदा जब किसी दुर्घटना के लिए पहले से कोई कदम ना उठाया जाए।
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'सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ा आरएसएस का हौसला'

हालांकि सुनील कुमार वैद्य ने इन आरोपों से इंकार किया है। उनका कहना है कि कुछ लोग उनके पास अपनी शिकायत लेकर आए थे। उनका कहना था कि कुछ मुस्लिम अपराधी माता की चौकी के आयोजन में बाधा डाल रहे हैं।

इस पर वैद्य ने अपने ऑफिस में क्षेत्र के एसएचओ और एसीपी को फरीयादी लोगों की शिकायत बताने के लिए बुलाया था। वैद्य ने दीवाली वाली रात को किसी भी तरह की सभा करने से इंकार किया है।

वहीं आप के साथ-साथ कांग्रेस ने भी हिंदुवादी ताकतों को त्रिलोकपुरी की हिंसा का जिम्मेदार माना है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने तो यहां तक कहा कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद से विहिप और आरएसएस ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। यह एक चिंता का विषय है क्योंकि दिल्ली में 1984 के बाद से आजतक एक भी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए हैं।
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