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Delhi: केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ 'आप' का अगला कदम, प्रतियां जलाकर करेगी विरोध

Fri, 30 Jun 2023 03:47 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी के कैंपेन के अगले चरण की घोषणा कर दी गई है। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के अध्यादेश की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।
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सौरभ भारद्वाज - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी के कैंपेन के अगले चरण की घोषणा कर दी गई है। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के अध्यादेश की प्रतियां जलाने का फैसला किया है। तीन जुलाई को आम आदमी पार्टी केंद्र के अध्यादेश की प्रतियां जलाएगी। वहीं, आम आदमी पार्टी ने पांच जुलाई को सभी विधानसभाओं में और छह से 13 जुलाई तक हर गली-मोहल्ले-चौके पर अध्यादेश की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।

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अध्यादेश के खिलाफ रामलीला मैदान में हुई थी आप की महारैली
रामलीला मैदान में हुई महारैली में सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने दिल्ली के लोगों के वोट का अपमान किया। पूरा देश दिल्ली वालों के साथ। 140 करोड़ लोग मिलकर संविधान बचाएंगे। अंदर से पता चला है, जैसे दिल्ली में तानाशाही लागू हई, कल इसी तरह बंगाल और राजस्थान के लिए भी लाया जाएगा। चौथी पास राजा को समझ नहीं आ रहा है कि देश कैसे चलाया जाए। चारों तरफ बेरोजगारी फैली हुई है। 

अध्यादेश पर पहले ही केंद्र को घेर चुके हैं केजरीवाल
सीएम केजरीवाल ने सीधे तौर पर भाजपा पर नौकरशाही के जरिये दिल्ली की सरकार चलाने का षडयंत्र रचने का आरोप लगाया था। केंद्र को घेरते हुए सीएम ने कहा था कि दिल्ली में अब चुनी हुई सरकार की नहीं, अफसरों की चलेगी। देश के इतिहास में यह पहली बार होगा। जब नौकरशाह चुनी हुई सरकार चलाएंगे।

काले अध्यादेश को हराना बहुत जरूरी
वहीं काले अध्यादेश को लेकर आम आदमी पार्टी ने कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया काला अध्यादेश न केवल दिल्ली की निर्वाचिक सरकार के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना है। बल्कि यह भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों के लिए भी खतरा बनेगा। यदि इसका विरोध नहीं किया गया तो इस तरह से अन्य राज्यों में भी अध्यादेश लाए जाएंगे। जिससे लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकारों की सत्ता को नुकसान होगा। इस काले अध्यादेश को हराना बहुत जरूरी है।
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काला अध्यादेश संविधान विरोधी
आम आदमी पार्टी ने कहा था कि पटना में समान विचारधारा वाली पार्टी की बैठक हुई। जिसमें 15 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें 12 का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में हैं। लेकिन कांग्रेस को छोड़कर अन्य सभी पार्टियों ने काले अध्यादेश के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपना रुख व्यक्त किया है।

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