लोकसभा चुनाव में करारी हार और फिर संयोजक अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी बिखरने लगी है।
शाजिया इल्मी और दो अन्य संस्थापक सदस्यों के पार्टी छोड़ने के बाद अब 'आप' में संकट के बादल मड़राने लगे हैं। इससे पार्टी के दिग्गजों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं।
पार्टी को बिखरने से बचाने और दिल्ली में विधानसभा चुनावों की आहट के मद्देनजर अब आम आदमी पार्टी ने विशेष प्लान बनाया है जो डूबती हुई नैया को पार लगाने का हथियार माना जा रहा है।
गिरती साख से गहराया संकट
लोकसभा चुनाव की हार और वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने से गिरती साख की काट आम आदमी पार्टी मोहल्ला सभाओं में ढूंढ रही है।
फिलहाल विधायकों को निर्देश दिया गया है कि वह अपने इलाके के विकास कार्यों के बारे में आम लोगों से रायशुमारी कराएं। इसके आधार पर विधायक निधि से होने वाले कार्यों की प्राथमिकता तय की जाएगी।
पार्टी का मानना है कि दिल्ली में इससे जनभागीदार पर आधारित लोकतंत्र की शुरुआत होगी। इसका दोहरा फायदा होगा। आम लोग अपने इलाके की समस्याओं के निदान से जुड़ेंगे।
ये है AAP का असली प्लान
वहीं, विधायकों को लोगों से सीधे संवाद का मौका मिलेगा। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा और कांग्रेस विधायकों के इलाके में इस तरह की कवायद नदारद रहेगी। इन क्षेत्रों के आप नेता आम लोगों को अपनी पार्टी विधायकों के काम की जानकारी देते रहेंगे।
पार्टी के मुताबिक, आबादी के हिसाब से एक वार्ड को करीब दस मोहल्ला सभाओं में बांटा गया है। सभी विधायकों ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।
कुछ इलाकों में चिट्ठी भेजी जा रही है तो कुछ में प्रस्ताव तैयार है। कुछ विधायकों ने तो मोहल्ला सभा शुरू भी कर दी है। विधायक फंड आने के बाद सभाओं में तैयार प्रस्तावों पर काम शुरू किया जाएगा।