दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब कांग्रेस नेता विक्रम मजीठिया से माफी मांगने से आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ता सकते में हैं। वे केजरीवाल के इस अप्रत्याशित कदम के लिए उनके इर्द-गिर्द रहने वाली मंडली को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव को लेकर आप के अंदर आई दरार इस मामले से और गहरा गई है। वहीं, पंजाब में आप के नेता, विधायक और कार्यकर्ता एक अलग पार्टी बना सकते हैं। आप की पंजाब पार्टी इकाई के प्रभारी और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने खुद को अलग कर लिया है।
वे मजीठिया पर ड्रग्स कारोबार में लिप्त होने के अपने बयान पर अडिग हैं। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि वे इस मामले पर अंत तक लड़ेंगे और विक्रम मजीठिया को जेल भिजवा कर ही दम लेंगे। मजे की बात है कि मजीठिया ने इस मामले में तीन आप नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया था।
केजरीवाल के अलावा आशीष खेतान ने भी माफी मांग ली है। उन्होंने माफीनामा संजय सिंह के पास भी भेजा था, लेकिन उन्होंने इस पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया। इस मामले में अदालत में संजय सिंह की पैरवी कर रहे वकील हिम्मत सिंह शेरगिल का कहना है कि मानहानि के मामले में अधिक से अधिक दो साल तक की सजा हो सकती है।
तीन साल से कम सजा पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध नहीं लगता है। अगर सजा हो भी जाए तो उसके खिलाफ सेशन कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील के रास्ते खुले हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम आठ से दस साल लगते। ऐसे में केजरीवाल को अचानक किस बात का डर लगा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से परामर्श करना भी जरूरी नहीं समझा।
शेरगिल का कहना हे कि पुलिस के पास मजीठिया के खिलाफ ढेरों सबूत हैं। पुलिस द्वारा पकड़े गए नशे के कई कारोबारियों ने अपने बयान में मजीठिया को ही कारोबार का सरगना बताया है। कई सबूत भी सौंपे हैं। बृहस्पतिवार को ही नशे के कारोबार की छानबीन करने के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स ने सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी है।
ऐसे में केजरीवाल को अचानक कैसे मालूम चला कि मजीठिया के खिलाफ ड्रग्स के आरोप आधारहीन हैं? उन्होंने यह नहीं बताया है कि किस जानकारी के आधार पर वे इस नतीजे पर पहुंचे।
मंडली ने घेरा केजरीवाल को
अरविंद केजरीवाल
आप नेताओं का मानना है कि एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता जैसे व्यापारियों को राज्यसभा भेजने के बाद मजीठिया से माफी मांग कर केजरीवाल ने अपनी पूरी प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला दी है। उन्होंने आम कार्यकर्ताओं से मिलना जुलना कम कर दिया है और उन्हें घेरे रहने वाले चंद लोगों के कहने पर ही फैसले ले रहे हैं।
पहले उन्होंने इस मामले में एक के बाद एक वकील बदले। एक सुनवाई में तो केजरीवाल और खेतान ने अपना केस लड़ने के लिए कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी को ही बुला लिया था। लेकिन फिर अपने पहले के बयानों को खुद ही आधारहीन करार देकर उन्होंने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। जबकि पंजाब में पूरा चुनाव आपने पंजाब को नशे की गिरफ्त से छुड़ाने के मुद्दे पर लड़ा था।
तब लड़े जब कुछ भी पास नहीं था तो अब माफी क्यों?
एक अन्य वरिष्ठ नेता का कहना था कि जब आम आदमी पार्टी कहीं सत्ता में नहीं थी, उसके पास संसाधन नहीं थे, तब भी वह मुकेश अंबानी जैसे ताकतवर लोगों से लड़ रही थी। तो आज जब आप के पास दिल्ली में 67 और पंजाब में 22 विधायक हैं तो यह दलील हास्यास्पद ही है कि हमारे पास केस लड़ने और वकील की फीस देने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए माफी मांग रहे हैं।