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एसिड अटैक पीड़िता को बनाया अपनी वैलेंटाइन

Sat, 15 Feb 2014 02:13 PM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, दिल्ली
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‘ढाई अक्षर प्रेम के’ पर आधारित कई कहानियां व फिल्में हमने सुनी व देखी होंगी, लेकिन लक्ष्मी और आलोक की कहानी इन सबसे जुदा और निराली है। यहां प्रेम का पैमाना खूबसूरती नहीं, बल्कि गुण और सादगी है। आलोक ने ऐसी लड़की को जीवन संगिनी के रूप में चुना, जिसके चेहरे समेत शरीर का ऊपरी हिस्सा एसिड से जल चुका है।
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लक्ष्मी को पहले वेलेंटाइन डे पर आलोक ने ब्लैक रोज कैंपेन का तोहफा दिया है, जिसमें उसकी जैसी लड़कियों को समाज में आगे बढ़ने का मंच मिले। लक्ष्मी के मुताबिक, शुक्रवार को सुबह आलोक ने सीपी चलने को कहा। रास्ते में उसने बताया कि मैं तुम्हें ब्लैक रोज कैंपेन गिफ्ट दे रहा हूं।

लक्ष्मी ने बताया कि वेलेंटाइन डे पर जहां युवा प्रेम दिवस को सेलीब्रेट कर रहे थे, वहीं कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें एकतरफा या पार्टनर के धोखे ने तोड़ दिया था। हमने ऐसे लोगों को चुना और उन्हें इस कैंपेन का हिस्सा बनाया। उन्हें समझाया कि प्रेम दो लोगों के बीच एक ऐसी आत्मिक भावना है, जोकि जबरदस्ती नहीं बनायी जा सकती।
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यदि उनका पाटर्नर या प्रेमी उनकी दोस्ती ठुकरा देता है तो उससे बदला या चोट पहुंचाने की बजाय उसे आजाद छोड़ दें। अपने दिल की बात कागज पर लिखें और ब्लैक रोज के साथ उसे गिफ्ट करें, ताकि वो उन भावनाओं को समझ सकें।

आलोक कहता है कि मैं स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन के दौरान मई 2013 में लक्ष्मी से एक दोस्त के माध्यम से मिला था। लक्ष्मी की कहानी व हौसला देख मैं उससे बेहद प्रभावित था। मुलाकातों के दौरान लक्ष्मी की सादगी व सच्चाई ने मुझे पास ला दिया और मैंने अपने दिल की बात उससे कह दी। शुरुआत में दोस्त बनें, लेकिन पिछली 7 अगस्त को एक साथ जीवन बिताने का फैसला किया।

लक्ष्मी के मुताबिक, आलोक से मिलने के बाद मेरे जीवन में निगेटिव सोच खत्म हो गई और अब समाज का खुलकर सामना करने को तैयार हूं। जिस समाज ने तेजाबी हमले के चलते चेहरा खराब होने पर मुझे ठुकरा दिया था, इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी।

अब उसी समाज की बंदिशों को तोड़ते हुए हम बिना शादी के लिव-इन में रहकर जिंदगी बिताना चाहते हैं। क्योंकि शादी किसी भी रिश्ते का आधार नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने की सोच व एक-दूसरे के प्रति इज्जत व सम्मान मुख्य होता है। आलोक के मुताबिक, लक्ष्मी मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की लगती है, जिसमें सच्चाई व हौसला है।

क्या था मामला
बता दें कि 22 अप्रैल 2005 को पूर्वी दिल्ली इलाके में लक्ष्मी पर एक युवक ने तेजाब से हमला किया था। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली लक्ष्मी की उम्र तब महज 15 वर्ष थी। युवक के एकतरफा प्रेम को अस्वीकार करने पर तेजाब फेंका था। तेजाबी हमले के चलते लक्ष्मी के चेहरे समेत गर्दन, हाथ व पेट का 45 फीसदी हिस्सा जल गया था। तेजाबी हमले के चलते लक्ष्मी के 9 सालों में 7 बड़े ऑपरेशन हो चुके हैं, लेकिन चेहरे समेत शरीर की अन्य बनावट पहले जैसी नहीं बन पाई है।
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