एक दिव्यांग 12 वर्षीय बच्ची की एक जुलाई को कथित तौर पर भूख के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई। आरोप है कि आधार कार्ड पेश न कर पाने के कारण उसे राशन और आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से इस मामले में सफाई मांगी है। सरकार को अपना जवाब 14 जुलाई तक दाखिल करना है।
दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए काम कर रहे कबीर सिद्दीकी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान सामान्य लोगों की समस्याएं भी बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन दिव्यांग लोगों पर इसकी बहुत अधिक मार पड़ी है क्योंकि अब लोग उनकी सहायता के लिए भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
स्वयंसेवी संगठनों की मदद भी इन तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को इनकी मदद के लिए विशेष योजना बनानी चाहिए, जिससे यह वर्ग उपेक्षा का शिकार न हो।
दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि उसने लॉकडाउन और इसके बाद लगातार 72 लाख राशनकार्ड लाभार्थियों को राशन उपलब्ध करवाया है।
जिन लोगों के पास राशन कार्ड उपलब्ध नहीं था, एक सामान्य रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें भी प्रति माह पांच किलो राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार ने विधवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन भी बढ़ाकर दोगुना कर दी है। सरकार के इन दावों के बीच यह घटना बड़े सवाल खड़े करती है।