-दिल्ली विधानसभा में मनाई युद्ध-सम्मेलन की 108वीं वर्षगांठ, सैनिकों के बलिदान को किया याद
-1918 के ऐतिहासिक सम्मेलन की स्मारक पुस्तक भी हुई लॉन्च
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
सैनिक किसी पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सेवा के विश्वास के साथ लड़ता है। ये संदेश दिल्ली विधानसभा में आयोजित संगोष्ठी में मिजोरम के राज्यपाल जनरल डॉ. वीके सिंह ने दिया। प्रथम विश्व युद्ध और भारत विषय पर हुए कार्यक्रम में भारतीय सैनिकों के बलिदान और इतिहास की अहमियत पर विस्तार से चर्चा हुई।
दिल्ली विधानसभा में 1918 के ऐतिहासिक युद्ध-सम्मेलन की 108वीं वर्षगांठ के मौके पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि वीके सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने कभी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि कर्तव्य और राष्ट्रहित के लिए युद्ध लड़ा। उन्होंने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध में 13 लाख से अधिक भारतीय सैनिक शामिल हुए थे, जिनमें करीब 74 हजार ने जान दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विजेंद्र गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपने अभिलेखों को सुरक्षित नहीं रखता, वह अपनी स्मृति और दिशा दोनों खो देता है। उन्होंने 1918 के सम्मेलन को विश्वास और विश्वासघात की कहानी बताते हुए कहा कि उस समय भारत ने ब्रिटिश शासन का साथ दिया, लेकिन बदले में रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसी घटनाएं सामने आईं।
सम्मेलन की स्मारक पुस्तक भी हुई लॉन्च
इस अवसर पर प्रोसीडिंग्स ऑफ द वॉर कॉन्फ्रेंस हेल्ड एट दिल्ली (27-29 अप्रैल 1918) नामक स्मारक पुस्तक का विमोचन किया गया। ये प्रकाशन उस दौर की चर्चाओं व फैसलों को सामने लाता है और इतिहास को समझने में मदद करता है। वीके सिंह ने कहा कि भारतीय जवानों ने यूरोप, पूर्वी अफ्रीका और मध्य पूर्व में अपनी बहादुरी दिखाई। हाइफा की लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह भारतीय सेना की वीरता का बड़ा उदाहरण है।
सैनिकों के बलिदान नहीं भूलेंगे
कार्यक्रम में गांधी स्मृति व दर्शन समिति के प्रतिनिधि, विधायक, इतिहासकार, पूर्व सैनिक और शिक्षाविद शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह सैनिकों के बलिदान को याद रखे और उनसे प्रेरणा ले। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य केवल इतिहास को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर देश के भविष्य को मजबूत बनाना भी रहा।