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Delhi NCR News: छह माह के लिए घर में रहने आया रिश्तेदार, अब 10 साल बाद कोर्ट के आदेश पर खाली करेगा मकान

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-साकेत कोर्ट का फैसला, लाजपत नगर की संपत्ति का कब्जा महिला को सौंपने के आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
रिश्तेदारी के कारण छह महीने के लिए मुफ्त में रहने की अनुमति देना एक महिला को भारी पड़ गया। व्यक्ति ने मकान खाली नहीं किया और मामला 10 साल तक अदालत में चलता रहा। अब साकेत कोर्ट ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी को लाजपत नगर स्थित मकान खाली कर उसका शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही, उसे मुकदमा दायर होने की तारीख से मकान खाली करने तक 50 हजार रुपये प्रतिमाह देने होंगे।
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दक्षिण-पूर्व जिला न्यायाधीश ऋचा गुसाईं सोलंकी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामला बचन अरोड़ा और उनके रिश्तेदार सूरज प्रकाश के बीच लाजपत नगर स्थित ग्राउंड फ्लोर के करीब 100 वर्ग गज के मकान को लेकर था। बचन अरोड़ा के अनुसार, उन्होंने 2005 में संपत्ति के दस्तावेज अपने पक्ष में कराए और इसके बाद संपत्ति कर भी भरती रहीं। साल 2007 में रिश्तेदारी के कारण सूरज प्रकाश ने छह महीने के लिए मकान में मुफ्त रहने की अनुमति मांगी थी। समय पूरा होने के बाद उसने आर्थिक तंगी बताकर और समय मांगा। आरोप है कि वह लगातार मकान खाली करने में टालमटोल करता रहा। वहीं, सूरज प्रकाश ने खुद को संपत्ति का मालिक बताया। उसने दावा किया कि वह 2005 से मकान में रह रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेज और गवाही पर विचार के बाद प्रतिवादी के दावों में कई विरोधाभास पाए और महिला के पक्ष को अधिक भरोसेमंद माना। कोर्ट ने माना कि प्रतिवादी को 2007 में महिला ने मुफ्त लाइसेंसधारी के रूप में रहने की अनुमति दी थी। अदालत ने 50 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से उपयोग और कब्जे का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अगस्त 2027 से यह राशि 10 प्रतिशत बढ़कर 55 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगी। मुकदमे का खर्च भी प्रतिवादी को देना होगा।
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