आईजीएनसीए में कठपुतली प्रदर्शनी का समापन, बच्चों ने अपनों हाथों ने बनाई कठपुतलियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कठपुतली कला को युवा पीढ़ी से जोड़ने वाली कला प्रदर्शनी और कार्यशाला का बृहस्पतिवार को समापन हुआ। इसे अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह 2026 के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित किया गया था। सांस्कृतिक अभिलेखागार प्रभाग की ओर से आयोजित ‘आर्काइव्स, परफॉर्मेंस एंड ट्रेडिशनल आर्ट्स’ कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं को भारतीय लोक कलाओं से परिचित कराया गया। कठपुतली कार्यशाला के अंतिम दिन बच्चों का उत्साह देखते ही बना। रंग-बिरंगे पात्रों और लोक कथाओं से सजे कठपुतली शो ने बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात कठपुतली कलाकार पूरन भट्ट के मार्गदर्शन में बच्चों ने अपने हाथों से पारम्परिक कठपुतलियां बनाना सीखा। साथ ही विशेष कठपुतली शो में राजस्थान की लोक-सांस्कृतिक विरासत और वीर योद्धा अमर सिंह राठौर से जुड़ी कथा का जीवंत मंचन किया गया।
कलाएं हमारी सांस्कृतिक स्मृति की अमूल्य धरोहर - डॉ. सच्चिदानंद जोशी
इस अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। उन्होंने लोक कलाओं, अभिलेखों और प्रदर्शन परम्पराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसी कलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति और सामाजिक इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं से इन परंपराओं के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ने का आह्वान किया।