- यमुना कछार की चुनौतीपूर्ण जमीन पर ड्रोन सर्वे और सॉइल टेस्टिंग के बाद तय होगी नींव, 8 से 10 लाख लोगों को मिलेगा त्वरित अग्निशमन सुरक्षा कवच
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। घनी आबादी वाले इलाकों और यमुना पार के कछार क्षेत्र में अग्निशमन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने पहल तेज कर दी है। गीता कॉलोनी के राजाराम कोहली मार्ग पर प्रस्तावित नए फायर स्टेशन के निर्माण से पहले जमीन का विस्तृत डिजिटल सर्वे और सेफ बियरिंग कैपेसिटी टेस्ट कराया जाएगा। यमुना के नजदीक स्थित यह इलाका बाढ़ प्रभावित और रेतीली मिट्टी वाला है, इसलिए यहां भवन निर्माण के लिए विशेष तकनीकी सावधानी बरती जा रही है।
विभाग डिजिटल मैपिंग और मिट्टी की भार वहन क्षमता की जांच के आधार पर फायर स्टेशन की नींव और स्ट्रक्चरल डिजाइन तय करेगा। ड्रोन सर्वे के माध्यम से जमीन का विस्तृत नक्शा तैयार किया जाएगा। इसमें दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए एप्रोच रोड और यू-टर्न के लिए जरूरी जगह का भी आकलन किया जाएगा। सॉइल टेस्टिंग के दौरान अलग-अलग गहराइयों से मिट्टी के नमूने लेकर उसकी क्षमता जांची जाएगी।
संकरी गलियों और ट्रैफिक से चुनौती
वर्तमान में गीता कॉलोनी, गांधी नगर, शास्त्री नगर, कृष्णा नगर और पुराना सीलमपुर जैसे इलाकों में आग लगने पर दमकल की गाड़ियां शाहदरा, लक्ष्मी नगर या कश्मीरी गेट से पहुंचती हैं। विकास मार्ग और पुश्ता रोड पर ट्रैफिक जाम के कारण कई बार मौके तक पहुंचने में 20 से 30 मिनट लग जाते हैं। वहीं, 8 से 10 फीट चौड़ी संकरी गलियां भी दमकल वाहनों के लिए चुनौती बनती हैं। गांधी नगर के बड़े रेडीमेड कपड़ा बाजार में आग का खतरा विशेष रूप से गंभीर है। गोदामों में कपड़ा और धागा बड़ी मात्रा में होने के कारण आग तेजी से फैल सकती है।
8 से 10 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
नए फायर स्टेशन से गीता कॉलोनी के ब्लॉक-1 से 17, गांधी नगर बाजार, सुभाष रोड, कांति नगर, शांति मोहल्ला, शास्त्री नगर, धर्मपुरा और कृष्णा नगर के करीब 8 से 10 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित स्टेशन से दमकल का रिस्पॉन्स टाइम घटकर करीब 5 से 7 मिनट होने का लक्ष्य है। संकरी गलियों के लिए छोटे वाटर टेंडर और त्वरित प्रतिक्रिया वाहन भी तैनात किए जा सकेंगे।
विभाग के अनुसार डिजिटल सर्वे और सॉइल टेस्टिंग का काम करीब 20 दिनों में पूरा करने की तैयारी है। रिपोर्ट मिलने के बाद भवन की नींव और संरचनात्मक डिजाइन तय कर मुख्य निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। दिल्ली के भूकंपीय जोखिम को देखते हुए निर्माण में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।