कुछ शामें केवल बीतती नहीं, स्मृतियों में उतर जाती हैं। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में बुधवार को आयोजित ‘आईआईसी डबल बिल म्यूजिक रिसाइटल’ ऐसी ही एक संध्या रही, जहां रबाब के गंभीर स्वरों और हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की मधुर लहरियों ने श्रोताओं को संगीत के सौंदर्य और साधना से साक्षात्कार कराया। संध्या का आरंभ रबाब वादक इमरान खान की प्रस्तुति से हुआ। उस्ताद गुलफाम अहमद खान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने वादन से रबाब की गूंज में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और संवेदनशीलता को साकार किया। तबले पर इमरान अर्श खान की सधी हुई संगत ने प्रस्तुति में लय और विस्तार का सुंदर संतुलन रचा।
इसके बाद मंच संभाला हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका लक्ष्मीप्रिया नायक ने। गुरु विदुषी अंजना नाथ की शिष्या लक्ष्मीप्रिया ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति से सभागार को रागों के भावलोक में पहुंचा दिया। उनके गायन में परंपरा की गरिमा और अभिव्यक्ति की सहजता का सुंदर संगम दिखाई दिया। तबले पर अरुणव दत्ता बनिक और हारमोनियम पर मुकेश भारद्वाज की संगत ने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान ऐसा लगा मानो सुर, लय और ताल मिलकर एक ऐसा संगीत-लोक रच रहे हों, जहां शब्दों की आवश्यकता ही नहीं रह जाती। हर प्रस्तुति के साथ सभागार तालियों की गूंज से भर उठता और श्रोता कलाकारों की साधना को सराहते रहे। आईआईसी की यह संगीतमय संध्या केवल एक प्रस्तुति भर नहीं रही, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और जीवंत सांगीतिक विरासत का एक सुंदर उत्सव बनकर सामने आई।