मृतका भारती को किसान पिता यतेंद्र पढ़ा लिखाकर अधिकारी बनाना चाहता था। लेकिन बेटी की मौत के साथ ही किसान पिता का सपना भी टूट गया। यतेंद्र ने बताया कि वह बेटी, बेटियों में कोई फर्क नहीं समझता। बेटे की ही तरह वह बेटियों को भी अच्छे स्कूल में पढ़ा रहा था। बड़ी बेटी योगिता को उसने बीएससी नर्सिंग में दाखिला दिलाया था।
वही छोटी बेटी भारती कक्षा नौ की छात्रा थी। बताया कि भारती पढ़ने में बहुत तेज थी। वह हमेशा अपनी क्लाश में स्थान लाती थी। वह भारती को पढ़ा लिखाकर अधिकारी बनाना चाहता था। भारती की मौत के साथ ही उसका बेटी को अधिकारी बनाने का सपना भी टूट गया है। बेटी की मौत पर यतेंद्र व उसके परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।