फोटो- जिला नागरिक अस्पताल का फाइल फोटो
रोहित नगीना।
जिस अस्पताल को सरकार ने मेवात के लोगों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद बताया था, आज वही अस्पताल गंभीर नवजातों के लिए ''इलाज का नहीं, रेफरल का केंद्र'' बन गया है।
करोड़ों रुपये की लागत से बने मांडीखेड़ा जिला नागरिक अस्पताल में नवजातों की जिंदगी बचाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सुविधा वेंटिलेटर तक उपलब्ध नहीं है। नतीजा यह है कि सांस लेने की बीमारी से जूझ रहे मासूमों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे शहरों के अस्पतालों में भेज दिया जाता है। लेकिन कई बार सफर इतना लंबा साबित होता है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी हार जाती है।
जुलाई 2026 में हरियाणा सरकार ने मांडीखेड़ा स्थित नए जिला नागरिक अस्पताल का वर्चुअल लोकार्पण करते हुए इसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस अस्पताल बताया था। दावा किया गया था कि अब क्षेत्र के लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं जिले में ही उपलब्ध होंगी। लेकिन अस्पताल की जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
- परिजनों का दर्द: अगर सुविधा होती, तो शायद हमारा बच्चा बच जाता
नगीना निवासी जतिन ने बताया कि उनका 25 दिन का नवजात गंभीर हालत में मांडीखेड़ा जिला अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने कुछ समय तक उपचार किया, लेकिन आवश्यक उपकरण उपलब्ध न होने के कारण बच्चे को रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार, बाद में अलवर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
जतिन का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में वेंटिलेटर जैसी सुविधा होती, तो शायद उनके बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल प्रशासन ने भी स्वीकार की कमीः
अस्पताल के चिकित्सक डॉ. धर्म सिंह यादव ने बताया कि फिलहाल अस्पताल में नवजातों के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ता है।
वहीं सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना ने कहा कि इस प्रकार की महंगी मशीनों की व्यवस्था सरकार के स्तर पर की जाती है। जैसे ही विभाग की ओर से उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, उन्हें अस्पताल में स्थापित कर दिया जाएगा।
समाजसेवियों ने उठाए सवालः
समाजसेवी रजत जैन का कहना है कि सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जिला अस्पताल में ही नवजातों के लिए जीवनरक्षक वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही नहीं होंगी, तो योजनाओं का लाभ आम लोगों तक कैसे पहुंचेगा।
वहीं नगीना निवासी मुबीन सेकेट्री ने कहा कि गरीब परिवारों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है।
पहले भी विवादों में रहा है अस्पतालः
मांडीखेड़ा जिला अस्पताल पहले भी लापरवाही के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। जुलाई 2025 में यहां डिलीवरी के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही से एक नवजात का हाथ शरीर से अलग हो जाने का मामला सामने आया था। इस घटना पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा था। इसके बावजूद आज भी अस्पताल में नवजातों के इलाज के लिए जरूरी संसाधनों का अभाव बना हुआ है।