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Delhi NCR News: मुआवजा योजना के दुरुपयोग पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के तहत पीड़ित मुआवजा योजना का दुरुपयोग करने पर एक वादी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने एकल पीठ के उस निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें वादी को अतिरिक्त मुआवजा देने से इन्कार किया गया था।

अदालत ने कहा कि वादी ने अपनी मर्जी से अभियुक्त के साथ समझौता किया था। इस कारण प्राथमिकी रद्द कर दी गई थी। पीठ ने नोट किया कि एकल पीठ ने विस्तृत कारणों के साथ स्पष्ट किया था कि वादी अतिरिक्त मुआवजा पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने वादी को आदेश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर उक्त जुर्माने की राशि दिल्ली हाईकोर्ट विधिक राज्य सेवाएं कमेटी के पास जमा कराए। अदालत ने पाया कि वादी ने 2014 में उसी व्यक्ति के खिलाफ उक्त अधिनियम के तहत एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके लिए उसे 2.40 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका था। वर्तमान मामले में भी वादी ने उसी व्यक्ति के खिलाफ समान धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। पीठ ने कहा कि यह स्थिति वादी के बयानों की सत्यता और प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा करती है।
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वादी ने 2019 में प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके तहत गैर-अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्तियों द्वारा किए गए अत्याचारों के पीड़ितों को मुआवजा मिलने का प्रावधान है। अक्तूबर 2019 में इस मामले में आरोप पत्र दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वादी ने अभियुक्त के साथ समझौता कर लिया था, इसलिए वह मुआवजा योजना के तहत लाभ का हकदार नहीं है।
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