कैंसर से पीड़ित गुड़गांव के धुनेड़ा गांव के ऑटो ड्राइवर कृष्णा को कैंसर था। तीसरे स्टेज में जब मुंह का कैंसर पता चला तो उसने जीने की उम्मीद भी छोड़ दी।
कृष्णा के पास इतनी दौलत भी नहीं थी कि वो उसे बेचकर इलाज करा सके। नउम्मीदी के बीच कृष्णा सिविल अस्पताल के कैंसर वार्ड में पहुंचा। जहां कैंसर विंग के डॉक्टर एसपी भनौत ने कृष्णा के अंदर न केवल जीने की उम्मीद जगाई, बल्कि उसे एक नई जीवन भी दी।
कुछ इसी तरह की कहानी फरीदाबाद के जगदीश की भी है। जगदीश और कृष्णा के अलावा सैंकड़ों ऐसे मरीज है, जिसके ऑपरेशन के जरिए डॉक्टर भनौत ने मरीजों की जिंदगी दी। डॉक्टर भनौत कहते है कि कृष्ण का इलाज मुश्किल था।
गुटखा और तंबाकू की वजह से पूरा मुंह और श्वास की नली कैंसर की चपेट में आ गया था। लेकिन, उसने थोड़ी हिम्मत दिखाई और करीब छह घंटे की ऑपरेशन के बाद उसके कैंसर के हिस्से को निकाल दिया गया। कृष्णा भले लड़खड़ा कर बोलता है और उसकी श्वास की नली गर्दन में ट्रांसप्लांट की गई है।
बता दें कि अप्रैल 2007 में सिविल अस्पताल में कैंसर विंग शुरू कराने का श्रेय टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल व कैंसर सेंटर रोहतक से प्रशिक्षित डॉ. एसपी भनौत को जाता है। तब से लेकर अबतक चार हजार से अधिक मरीजों का इलाज कर चुके हैं।
करीब चार सौ मरीजों को ऑपरेशन के जरिए ठीक किया है। सिविल अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. पुष्पा बिश्नोई कहती है कि कैंसर सर्जन डॉ. एसपी भनौत ने करीब 180 तो केवल मुंह व गले के कैंसर का इलाज कर नई जीवन दी है। इसके अलावा ब्रेस्ट कैंसर, आंत के कैंसर का भी सफल इलाज किया है।