नई दिल्ली। आरके पुरम स्थित तिरुवल्लुवर ऑडिटोरियम के तमिल संगम में शास्त्रीय संध्या अनंत का आयोजन हुआ। इसकी सूत्रधार प्रख्यात कथक नृत्यांगना भार्गवी सुदर्शन थीं। अंतिम संध्या में तीन प्रस्तुतियां हुईं जिसमें समन्वय, गोवर्धन लीला और संवाद हुआ।
समन्वय ने विभिन्न संगीत परंपराओं के मिलन को स्वर दिया। गोवर्धन लीला में कृष्ण कथा को नृत्य, भाव और लय के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया। संवाद ने कलाकारों के बीच लय और संगीत के मौन संवाद को प्रस्तुत किया। तीनों प्रस्तुतियों का मूल संदेश था कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं हर पीढ़ी में नए अर्थों से जीवंत रहती हैं।
कार्यक्रम समाप्ति पर भार्गवी सुदर्शन ने कहा कि प्रस्तुति खत्म हो सकती है, पर संगीत, कथा और लय निरंतर बहते रहते हैं। यही कला का अनंत है। संवाद