नई दिल्ली। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नजफगढ़ स्थित ओशो धाम में ध्यान, संगीत, सत्संग और कला के माध्यम से गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। दिनभर चले इस आयोजन में साधकों, कला प्रेमियों व ओशो अनुयायियों ने ध्यान और आत्मचिंतन के साथ गुरु परंपरा का उत्सव मनाया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मां आनंद भक्ति की 18 मंडला व अमूर्त चित्रों पर आधारित ध्यानमय कला प्रदर्शनी का उद्घाटन रहा, जो ओशो की वरिष्ठ शिष्या मां धर्म ज्योति और स्वामी चैतन्य कीर्ति ने किया। आयोजकों के अनुसार, चित्र ध्यान, समर्पण व आंतरिक शांति को रंगों व आकृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं।
इस अवसर पर मां आनंद भक्ति ने कहा कि उनकी कला कोई बनाई नहीं जाती, बल्कि मन के शांत होने पर सहज कैनवास पर उतर आती है। मां धर्म ज्योति ने इसे ध्यान व समर्पण का प्रतिबिंब बताया, तो स्वामी चैतन्य कीर्ति ने कहा कि मौन से जन्मी कला स्वयं ध्यान बन जाती है।
ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन के स्वामी अतुल आनंद ने कहा कि इस वर्ष ध्यानमय कला प्रदर्शनी ने समारोह को नया आयाम दिया। प्रदर्शनी 30 अगस्त तक ओशो धाम में दर्शकों के लिए खुली रहेगी। संवाद